दीपक मौदगिल, पटियाला

आगामी धान सीजन के मद्देनजर एग्रीकल्चर सेक्टर की बिजली डिमांड को पूरा करना पंजाब स्टेट पावर कार्पोरेशन लिमिटड (पावरकॉम) के लिए सहज नहीं रहने वाला। इसका कारण है कि राज्य में पिछले साल के मुकाबले इस साल एग्रीकल्चर सेक्टर की डिमांड में करीब 1491 मिलियन यूनिट की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। उक्त डिमांड को पूरा करने के लिए पावरकॉम को विभिन्न सेक्टरों से करीब 1350 मिलियन यूनिट पावर पर्चेज करनी होगी। पावर पर्चेज के इन समझौतों में सेंट्रल सेक्टर से मिलने वाली पावर, प्राइवेट सेक्टर से मिलने वाली और शार्ट टर्म पर्चेज शामिल होगी। एक ओर जहां पावर पर्चेज की जरूरत पड़ेगी, तो दूसरी ओर एग्रीकल्चर सेक्टर समेत विभिन्न वर्गो को रियायती दरों पर बिजली मुहैया करवाने के एवज में राज्य सरकार की ओर बनती सबसिडी का भुगतान समय पर न होना भी पावरकॉम के लिए सिरदर्द बना हुआ है।

पावरकॉम जानकारों के मुताबिक राज्य में पिछले साल पैडी सीजन के दौरान बिजली की कुल डिमांड 56464 मिलियन यूनिट रही। इसमें पावरकॉम के अपने थर्मल प्लांटों से 4275 मिलियन यूनिट और हाइड्रो पावर से 7210 मिलियन यूनिट शामिल थीं। सेंट्रल सेक्टर, प्राइवेट कंपनियों और शॉर्ट टर्म पर्चेज एग्रीमेंट्स के तहत 44979 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी गई। इस बार पावरकॉम मैनेजमेंट ने आगामी पैडी सीजन के लिए अनुमान लगाया है, उसके मुताबिक बिजली की मांग का आंकड़ा 57955 मिलियन यूनिट हो जाएगा। इसमें से 4360 मिलियन यूनिट बिजली थर्मल प्रोजेक्टों से तो 7285 मिलियन यूनिट बिजली हाइड्रो प्रोजेक्टों से हासिल होने का अनुमान है। बाकी 46310 मिलियन यूनिट बिजली की खरीद करनी होगी।

थर्मल पावर जनरेशन के लिए पावरकॉम के पास अब लहरा मोहब्बत, रोपड़ और बठिडा प्लांटों में कुल आठ यूनिट ही बचे हैं, जबकि इससे पहले ये कुल 14 यूनिट थे। इनमें से दो यूनिट रोपड़ के, तो चार यूनिट बठिडा के बंद हो चुके हैं। इसके साथ ही पावरकॉम थर्मल पावर के लिए राज्य में प्राइवेट कंपनियों के लगे राजपुरा, तलवंडी साबो और जीवीके प्लांटों पर निर्भर है जबकि हाइड्रो पावर के लिए मुख्य तौर पर भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) से मिलने वाले हिस्से पर निर्भर है। पावरकॉम की बिजली उत्पादन को लेकर अपने इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 1350 मेगावाट है और राज्य में इस समय बिजली की मांग करीब नौ हजार मेगावाट चल रही है।

चूंकि राज्य सरकार ने आगामी 13 जून से धान की रोपाई की मंजूरी दे दी है, तो उसके बाद निश्चित रूप से बिजली की मांग के इस आंकड़े में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

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सरकार से सबसिडी का भुगतान समय पर न मिलना भी एक परेशानी

एग्रीकल्चर सेक्टर समेत विभिन्न वर्गो को रियायती दरों पर बिजली मुहैया करवाने के बदले में सरकार से बनती सबसिडी का भुगतान समय पर न मिलना भी पावरकॉम के लिए सिरदर्द बना हुआ है। विभागीय जानकार बताते हैं कि बीती मई तक सरकार द्वारा इस संदर्भ में पावरकॉम को कुल 2271 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। बहरहाल इसमें से 319 करोड़ रुपये कैश और करीब 350 करोड़ रुपये इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी एडजस्टमेंट के रूप में पावरकॉम को मिले। ऐसे में सरकार की ओर पावरकॉम का करीब 1602 करोड़ रुपये बकाया है। पावरकॉम अधिकारी कहते हैं कि सबसिडी का सही समय पर भुगतान न मिलने से पावर पर्चेज और सप्लायरों की पेमेंट करने में दिक्कत होती है और उसी कारण भारी ब्याज दरों पर कर्ज लेना पड़ता है।

Posted By: Jagran

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