-फ्लैग: महिलाओं को खूब भा रहा फिटनेस और फोक डांस का फ्यूजन, इंटरनेट पर छाया योग गिद्दा

क्रॉसर..

-महिलाएं योग गिद्दा के जरिए दे रहीं स्वस्थ रहने का संदेश

-मध्यम व निम्न वर्ग के लिए बनाया महंगे जिम का निशुल्क विकल्प

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सुरेश कामरा, पटियाला: फिटनेस का क्रेज यूं तो महिलाओं पर हमेशा से ही हावी रहता है, लेकिन इसमें यदि पंजाबी फोक डांस और योग का तड़का लग जाए, तो बात ही कुछ और है। यही कारण है कि पटियाला की महिलाओं में इन दिनों योग गिद्दा काफी पॉपुलर हो रहा है।

पतंजलि योग समिति के महिला विंग की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सतिंदर कौर की पहल के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं इस नए किस्म के गिद्दा में रुचि दिखा रही है। सोशल मीडिया पर भी इसकी काफी धूम है। यू ट्यूब, फेसबुक व वॉट्सएप पर इसके वीडियों को काफी लाइक और शेयर किया जा रहा है।

कैसे आया आइडिया सतिंदर कौर पेशे से योग शिक्षक हैंऔर पतंजलि से जुड़ी हैं। काफी समय से वे निशुल्क योग कक्षाएं लगा रही हैं। उनकी साथी महिलाओं के साथ इस पर अक्सर चर्चा होती थी कि उच्च वर्ग की महिलाएं जिम में जाकर या फिर योग की पेड क्लासेज से फिटनेस हासिल कर रही हैं, जो काफी महंगा है। ग्रामीण या छोटे कस्बों की महिलाएं इतना खर्च वहन नहीं कर सकतीं। इसलिए ग्रामीण महिलाओं को इस ओर आकर्षित करने के लिए योग और गिद्दा का मिश्रण कर उन्होंने फिटनेस का नि:शुल्क विकल्प पेश किया। क्या है योग गिद्दा

पंजाबी लोक नाच गिद्दा की तर्ज पर महिलाओं ने योग गिद्दा तैयार किया है। इसमें योग क्रियाओं के साथ पंजाबी बोलियों को भी शामिल किया गया है। पंजाबी बोलियों पर गिद्दा करते हुए महिलाएं योग की क्रियाएं करती हैं, जिससे मनोरंजन के साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। इससे व्यायाम की नीरसता और थकान भी खत्म हो जाती है। महिलाओं ने इसके प्रचारित करने के लिए 3.09 मिनट का एक वीडियो भी तैयार किया है, जिसे सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है। चार बोलियों के साथ तिरंगे का सम्मान

गिद्दे में महिलाओं ने चार बोलियों का इस्तेमाल किया है। इनमें 'बारी बरसी खटण गया सी, खट के लयादे पावे, योगा कर कुड़िये, रोग न नेड़े आवे..' से शुरुआत की गई है। इसमें दूसरी बोली 'बारी बरसी खटण गया सी, खट के लयादी चादी, योगा कर कुड़िये, गोग्गड़ वधदी जादी..। तीसरी बोली, 'बारी बरसी खटण गया सी, खटके लयादे डोडे, योगा कर कुड़िये, कदे न दुखदे गोडे..' और चौथी बोली में 'बारी बरसी खटण गया सी, खटके लयादे छणके, योगी कर कुडिये, कदे न दुखदे मणकेके साथ इसका समापन किया गया है। समापन पर महिलाएं हरी, सफेद व संतरी रंग की चुनरी से तिरंगा बनाकर उसे सलाम करती हैं। इसलिए चुना गिद्दा

पंजाब के ग्रामीण व शहरी इलाकों में मध्यमवर्गीय महिलाएं अभी योग से दूर हैं। गिद्दा और बोलियों की पहुंच पंजाब के हर घर तक है। ऐसे में उन्होंने योग को गिद्दा के जरिए घर-घर पहुंचाने के लिए यह तरीका अपनाया। इस ग्रुप से जुड़ी महिलाएं अलग-अलग बोलियों पर गिद्दा कर सोशल मीडिया पर शेयर करेंगी। सतिंदर कौर ने बताय कि योग गिद्दा तैयार करने में प्रदेश कार्यकारिणी की सदस्य शशि नंदा ने भी उनका काफी सहयोग किया। ज्यादा कैलोरी खर्च होगी: डॉ. सचिन

मेडिसन स्पेशलिस्ट डॉ. सचिन कौशल का कहना है कि योग और गिद्दा का मेल लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित होगा। आम तौर लोग फिटनेस के लिए डांस एक्सरसाइज करते हैं। यह इसी का रूप है। इससे एनर्जी लेवल भी ज्यादा है, जिससे ज्यादा कैलोरी खर्च होगी। मोटापा कम करने के अलावा कई रोगों के लिए यह लाभदायक साबित होगा।

Posted By: Jagran

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