यादविदर गर्गस, नाभा (पटियाला)

शहर में जगह-जगह लगे गंदगी के डंप व नालों की सही ढंग से सफाई नहीं होने से शहरवासियों के लिए परेशानियों का सबब बनते जा रहे हैं। पिछले लंबे समय से शहर में फैली गंदगी ने लोगों का जीना मुहाल किया हुआ है।

शिअद-बसपा के प्रत्याशी कबीर दास का कहना था कि नगर कौंसिल की लापरवाही से शहर में गंदगी फैली हुई है सही ढंग से नालों की सफाई नहीं की जाती और न ही डंपों से समय पर गंदगी उठाई जाती है। आम आदमी पार्टी एससी विग पंजाब के ज्वांइट सेक्रेटरी जस्सी सोहियांवाला ने कहा कि नगर कौंसिल की लापरवाही के कारण शहर के हर गली मोहल्ले के बाहर गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। शहर के बीचों-बीच पुराना हाई कोर्ट में बना गंदगी का डंप लोगों के लिए अभिशाप बना हुआ है। यहां कई स्कूल व मंदिर भी मौजूद है बावजूद इसके सफाई का कोई प्रबंध नहीं है। हलके के विधायक कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं लेकिन इस गंभीर समस्या का समाधान करवाने में बुरी तरह से असफल साबित हुए हैं।

इस संदर्भ में नगर कौंसिल के प्रधान रजनीश मित्तल शैंटी का कहना था कि नगर कौंसिल के पास साल 2007 तक पक्के 135 सफाई सेवक थे अब केवल 69 ही रह गए हैं। वहीं, नाभा का क्षेत्रफल कई गुना बढ़ चुका है। सरकार ने 1984 से सफाई सेवकों की कोई पक्की भर्ती नहीं की जिस कारण शहर में थोड़ी बहुत समस्या आई है। इस समस्या को दूर करने के लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री साधु सिंह धर्मसोत के प्रयास से शहर की मोहल्ला सुधार सोसायटी में काम कर रहे 91 सफाई सेवकों को नगर कौंसिल द्वारा एक साल के लिए डीसी रेट पर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा ठेकेदार द्वारा 50 आउटसोर्स सफाई कर्मियों को रखा है। गंदगी उठाने के करीब 68 लाख रुपये का ठेका दिया हुआ है। पहले शहर में 24 सेकेंडरी प्वाइंट थे जिन्हें घटाकर अब 12 कर दिया है। जिनसे रोज कूड़ा उठाया जाता है। नगर कौंसिल ने हाल ही में कूड़े से खाद तैयार करने के लिए चार मशीनें खरीदी हैं। शहर में बढ़ रहे कूड़े को समाप्त करके खाद में उपयोग किया जाएगा। क्या कहना है लोगों को

नाभा निवासी श्रीशांत बातिश ने कहा कि सरकार को शहर में सफाई सेवकों की भर्ती बड़ी संख्या में करके गंदगी का स्थायी समाधान निकालना चाहिए। जगह-जगह लगे गंदगी के ढेर आम लोगों के साथ-साथ बाजार में घूमते आवारा पशुओं के लिए भी मुसीबत बने हुए हैं। नाभा निवासी भूपेंद्र सिंह का कहना है कि शहर की गंदगी के लगे ढेरों में मक्खी मच्छर जहां बीमारियों को दावत देते हैं, वहीं, शहरवासियों को दुर्गंध भरे माहौल का सामना करना पड़ता है। हालत यह है कि इस तरह के रास्तों से लोगों का गुजरना भी मुशिक्ल हो जाता है।

Edited By: Jagran