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हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने भी छोड़ा शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत, समर्थकों के साथ किया पार्टी से अलग होने का एलान

Published: Thu, 05 Nov 2026 01:04 PM (IST)

प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के बेटे हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने अपने समर्थकों के साथ शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत छोड़ दिया है।

चंदूमाजरा परिवार का अकाली दल पुनर सुरजीत को बड़ा झटका, हरिंदरपाल ने समर्थकों संग छोड़ी पार्टी।

चंदूमाजरा परिवार का अकाली दल पुनर सुरजीत को बड़ा झटका, हरिंदरपाल ने समर्थकों संग छोड़ी पार्टी।

HighLights

  1. हरिंदरपाल चंदूमाजरा ने समर्थकों संग अकाली दल पुनर सुरजीत छोड़ी।

  2. पार्टी की अप्रभावी कार्यशैली और पंथक एकता पर मतभेद मुख्य कारण।

  3. सुखबीर बादल के अकाली दल में जाने पर अभी फैसला नहीं।

जागरण संवाददाता, पटियाला। शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के पार्टी से अलग होने के फैसले के एक दिन बाद अब उनके बेटे हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने भी अपने समर्थकों के साथ पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है।

वीरवार को गुरुद्वारा श्री दुखनिवारण साहिब, पटियाला में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने विधानसभा हलका सनौर के पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ सामूहिक रूप से पार्टी से अलग होने की घोषणा की।

हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने पार्टी से अलग होने का फैसला कार्यकर्ताओं की भावनाओं और सुझावों को ध्यान में रखकर लिया है। उन्होंने कहा कि प्रो. चंदूमाजरा का राजनीतिक जीवन पंजाब के संघर्षों और पंथक मुद्दों के लिए समर्पित रहा है।

विद्यार्थी जीवन से लेकर अब तक उन्होंने पंजाब के हकों की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई है। आपातकाल के दौरान जेल भी काटी और संसद में पंजाब के मुद्दों को बेबाकी से उठाया।

उन्होंने कहा कि पिछले लंबे समय से पंजाब सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जिस तरह की भूमिका निभाने की उम्मीद थी, उसमें पार्टी प्रभावी कार्यक्रम तैयार नहीं कर सकी। विरोध केवल अखबारों की खबरों और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित होकर रह गया था, जबकि संघर्षों से निकले नेताओं से लोगों को सड़क पर उतरकर नेतृत्व करने की उम्मीद थी।

हरिंदरपाल सिंह ने कहा कि प्रो. चंदूमाजरा ने पंथक एकता और बिखरी हुई अकाली शक्ति को एक मंच पर लाने की अपील की थी, लेकिन इस मुद्दे पर ज्ञानी हरप्रीत सिंह की प्रतिक्रिया से विचारों और कार्यशैली में बड़ा अंतर महसूस हुआ। उन्होंने कहा कि जब विचार और कार्यशैली मेल नहीं खाते तो किसी के मन पर बोझ रखने के बजाय अलग होने का फैसला लेना उचित है।

उन्होंने बताया कि प्रो. चंदूमाजरा के फैसले के बाद सनौर हलके के कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में फोन आए। इसके बाद हुई बैठक में सभी ने एकमत होकर उनके फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सनौर हलके के लोगों का चंदूमाजरा परिवार के साथ लंबे समय से राजनीतिक और पारिवारिक जुड़ाव रहा है। वर्ष 1985 में कम उम्र में प्रो. चंदूमाजरा को विधानसभा भेजने से लेकर 2017 के चुनाव तक इस हलके के लोगों ने उनका साथ दिया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने बताया कि उनके साथ हलका सनौर के ब्लॉक समिति सदस्य, प्रदेश स्तर के पदाधिकारी, जिले के नेता, सभी 10 सर्कल अध्यक्ष, करीब 450 जिला और राज्य स्तरीय डेलीगेट तथा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि सभी ने सामूहिक रूप से शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत से अलग होने का फैसला किया है।

सुखबीर बादल के नेतृत्व वाले अकाली दल में जाने पर अभी फैसला नहीं

सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल में शामिल होने के सवाल पर हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने स्पष्ट किया कि अभी इस संबंध में कोई फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि आगे का निर्णय कार्यकर्ताओं की राय और भावनाओं को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

इसके लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बैठक भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि फैसला चाहे आज लिया जाए या कुछ दिन बाद, उसका आधार पंजाब के हित और पंथक शक्ति को एक मंच पर एकत्रित करना होगा।

बीबी जागीर कौर समेत अन्य नेताओं की एकता की भावना का किया समर्थन

हरिंदरपाल सिंह ने बीबी जागीर कौर, गुरप्रताप सिंह वडाला, परमिंदर सिंह ढींढसा और सुच्चा सिंह छोटेपुर समेत अन्य अकाली नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि सभी नेताओं की सोच और काम करने का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन पंथक शक्ति को एक मंच पर लाने की भावना सभी में है।

उन्होंने कहा कि एकता की इस भावना का सम्मान किया जाना चाहिए और सभी को मिलकर अकाली दल की बिखरी हुई ताकत को एकजुट करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने दोहराया कि उनका अगला राजनीतिक कदम कार्यकर्ताओं की राय के बाद ही तय होगा और उनकी प्राथमिकता पंजाब के हकों, हितों तथा पंथक एकता को मजबूत करना रहेगी।

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