'एक ही कमरे से 45 फीसदी बच्चे पास, गैरहाजिर अभ्यर्थियों का भी हुआ सेलेक्शन'; पंजाब PCS परीक्षा में CBI जांच की मांग
पंजाब पीसीएस मुख्य परीक्षा 2026 के परिणाम घोषित होते ही चयन प्रक्रिया में धांधली और अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।

पंजाब PCS रिजल्ट में धांधली के आरोप।
HighLights
पीपीएससी पीसीएस मुख्य परीक्षा 2026 परिणाम पर विवाद।
अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया।
सीबीआई जांच और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट जाने की चेतावनी।
जागरण संवाददाता, पटियाला। पंजाब लोक सेवा आयोग (पीपीएससी) की ओर से आयोजित पंजाब पीसीएस मुख्य परीक्षा 2026 का परिणाम बुधवार (4 नवंबर) देर रात घोषित कर दिया गया। परिणाम जारी होते ही चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
अभ्यर्थियों ने परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं और धांधली के आरोप लगाते हुए चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। अभ्यर्थियों ने एक ही परीक्षा कक्ष से बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के चयन, लगातार रोल नंबरों के सफल होने और अनुपस्थित परीक्षार्थियों के रोल नंबर परिणाम में शामिल होने का दावा किया है। इन आरोपों को लेकर उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की है।
एक ही कमरे से 40 प्रतिशत से अधिक चयन पर सवाल
अभ्यर्थियों की ओर से परिणाम का विश्लेषण करने के बाद कुछ परीक्षा केंद्रों के आंकड़ों पर सवाल उठाए गए हैं। उनका दावा है कि चार अलग-अलग परीक्षा केंद्रों के कुछ कमरों से 10 से अधिक उम्मीदवारों का चयन हुआ है। सेंटर-7 के कमरा नंबर-8 में परीक्षा देने वाले 24 अभ्यर्थियों में से 11 (45.8 प्रतिशत) को शॉर्टलिस्ट किया गया।
इसी तरह सेंटर-11 के कमरा नंबर-14 में 24 में से 10 (41.7 प्रतिशत) और सेंटर-4 के कमरा नंबर-19 में भी 24 में से 10 (41.7 प्रतिशत) अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। अभ्यर्थियों का कहना है कि एक ही कमरे से इतने अधिक उम्मीदवारों का चयन सामान्य संयोग नहीं माना जा सकता। इसकी जांच होनी चाहिए।
अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्रों के बीच चयन दर में अंतर को भी संदेहास्पद बताया है। उनके अनुसार सेंटर-8 में कुल शॉर्टलिस्टिंग दर 24.21 प्रतिशत रही, जबकि सेंटर-1 के कमरा नंबर-1 से 7 तक यह दर केवल 2.89 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद कमरा नंबर-8 से 18 तक चयन दर अचानक बढ़कर 13.77 प्रतिशत हो गई।
इसके अलावा परिणाम में लगातार क्रम वाले रोल नंबरों के चयन पर भी सवाल उठाए गए हैं। अभ्यर्थियों का तर्क है कि रोल नंबरों का आवंटन सीटिंग प्लान के अनुसार होने के कारण इस तरह लगातार रोल नंबरों का चयन जांच का विषय है।
अभ्यर्थियों ने यह आरोप भी लगाया है कि परिणाम में कुछ ऐसे परीक्षार्थियों के रोल नंबर शामिल हैं, जो परीक्षा में अनुपस्थित थे। उनका कहना है कि यदि ऐसा हुआ है तो यह परीक्षा और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
तीन गुना अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाने का नियम
अभ्यर्थियों ने इंटरव्यू के लिए चयनित उम्मीदवारों की संख्या पर भी आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि कुल 331 विज्ञापित पदों के मुकाबले केवल 751 उम्मीदवारों को ही इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है, जबकि भर्ती नियमों के अनुसार पदों की संख्या से तीन गुना अभ्यर्थियों को बुलाया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर भी आयोग की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिए जाने से अभ्यर्थियों में रोष है।
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सीबीआई से जांच की मांग
चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, पंजाब के मुख्यमंत्री और सीबीआई को ज्ञापन भेजकर पूरे मामले की स्वतंत्र जांच करवाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा परिणाम में सामने आई विसंगतियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और चयन प्रक्रिया से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो वे न्याय के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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