जागरण संवाददाता.पटियाला : अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ (एआइबीओसी) पंजाब इकाई ने बिना किसी आधार के बैंक अधिकारियों को पंजाब पुलिस द्वारा प्रताड़ित करने की पुरजोर निदा की गई। बैंक आफिसर्स को झूठे मामलों मे फंसाने वाले डिफाल्टर के खिलाफ मानहानि केस करने की अपील की है। एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपप्रधान दीपक शर्मा और पंजाब इकाई के सचिव राजीव सरहंदी ने कहा कि बैंक की लोन रिकवरी की कार्रवाई में कुछ ताकतवर डिफॉल्टर्स बैंक अधिकारियों के खिलाफ ही पुलिस में पहुंच रहे हैं, वे अपनी सहायक कंपनियों, विशेषकर पुलिस प्रशासन को अपने साथ लेते हुए रिकवरी को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। हाल ही में ऐसे मामले देखने को मिले हैं, जहां जांच एजेंसियों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अधिकारियों के मामलों लचीलापन दिखाया है। वहीं डिफाल्टर्स के पक्ष में कार्रवाई हुई।

बैंक अधिकारियों के नेताओं ने बताया कि एक ताजा मामला में चंडीगढ़ के बैंक अधिकारियों पर कपूरथला में पुलिस केस दर्ज कर लिया गया, जिसमें तीन महिला अधिकारी भारतीय स्टेट बैंक के पांच अधिकारी शामिल किए गए, जिन्हें पंजाब पुलिस ने एक डिफॉल्टर के इशारे पर झूठा फंसाया है। उन्होने बताया कि पंजाब पुलिस ने मामले में जो एफआइआर दर्ज की है, वह डिफॉल्टर से बकाया ऋण राशि की वसूली से बचने के लिए बैंक अधिकारियों को ही झूठे मामले में फंसाने की मिशाल पेश की है। भारतीय स्टेट बैंक ने इस मामले को पंजाब राज्य के बाहर सीबीआइ सहित एक स्वतंत्र एजेंसी को मामला स्थानांतरित करने के लिए एक याचिका माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में भी दायर की है।

एसोसिएशन के नेताओं के कहा कि बैंक अधिकारियों को बिना किसी आधार पर उत्पीड़न तुरंत रोका जाना चाहिए। निर्दोष अधिकारियों को सुरक्षा देनी चाहिए अन्यथा पूरे बैंकिग क्षेत्र का पतन हो जाएगा। बैंक की छवि धूमिल करने वालों पर स्टेट बैंक प्रबंधन अनुरोध करते हैं कि डिफॉल्टर के खिलाफ कम से कम 1 हजार करोड़ रुपये का आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर करें।

Posted By: Jagran

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