जागरण संवाददाता, पठानकोट: रेलवे कालोनी नंबर चार में बनाए गए मंदिर में से शनिवार को रेलवे विभाग के अधिकारियों ने मूर्तियां बाहर निकाल दी और साथ लगती चार दीवारी को तोड़ दिया। रेलवे द्वारा की गई इस कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने विरोध किया। लोगों ने कहा कि यह मंदिर करीब पचास साल पुराना है, जिसे रेलवे अब तोड़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि वे इसे किसी भी कीमत पर टूटने नहीं देंगे। इलाका निवासी राजकुमार राजू, सुनीता, आरती, सुधा समेत अन्यों ने बताया कि यह मंदिर 50 वर्ष पुराना है। पठानकोट की बड़ी आबादी की धार्मिक भावनाएं इस मंदिर से जुड़ी हैं।

रेलवे अधिकारियों ने गैर हिदू कर्मचारी बुलाकर मंदिर की दीवारें तुड़वाईं और सामान खंडित किया रहै। लोगों ने कहा कि वह जान दे देंगे, लेकिन मंदिर को टूटने नहीं देंगे। लोगों का आरोप है कि 50 वर्ष से लोग इस मंदिर में माथा टेकने आ रहे हैं। रेलवे ने लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है। वह मंदिर को किसी कीमत पर टूटने नहीं देंगे।

रेलवे परिसर में हुए अवैध कब्जों को हटाने का जारी हुआ है आदेश : पीडब्लयूआइ

आरपीएफ टीम के साथ मौके पर पहुंचे रेलवे के पीडब्लयूआइ (पब्लिक वर्कस इंस्पेक्टर) अनिल अग्रवाल ने कहा कि रेल मुख्यालय नई दिल्ली द्वारा मंडल को आदेश जारी किया है कि रेलवे की जमीन पर जहां भी कोई अवैध निर्माण हुआ है उसे गिराया जाए। इसी के तहत वह आज उक्त मंदिर को गिराने के लिए पहुंचे थे, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध की वजह से इसे स्थगित किया गया है। उन्होंने कहा कि मंदिर का पूरा हिस्सा तोड़ने के बजाय सिर्फ चारदिवारी ंतोड़ी गई है। उन्होंने कहा कि उक्त कार्रवाई की हायर अथारिटी को जानकारी दे दी गई है। उन्होंने बताया कि पठानकोट में 20 के करीब धार्मिक निर्माण किए गए हैं, जिन्हें एक-एक कर तोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि मंदिर का आधा ढांचा गिरा दिया गया है। आने वाले दिनों में बाकी बचा ढांचा भी गिराया जाएगा।

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