विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

फौजी पिता की लाडली ने जॉर्डन में लहराया तिरंगा! CISF जवान अंशिका ने एशियाई कराटे चैंपियनशिप में जीता रजत

Published: Mon, 14 Sep 2026 08:50 AM (IST)

पठानकोट की अंशिका भारद्वाज ने जॉर्डन में आयोजित 24वीं एशियाई कराटे चैंपियनशिप में अंडर-21 वर्ग में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है।

एशियाई कराटे चैंपियनशिप में पठानकोट की अंशिका भारद्वाज ने रचा इतिहास।

एशियाई कराटे चैंपियनशिप में पठानकोट की अंशिका भारद्वाज ने रचा इतिहास।

HighLights

  1. अंशिका भारद्वाज ने 24वीं एशियाई कराटे चैंपियनशिप में रजत पदक जीता

  2. जॉर्डन में आयोजित प्रतियोगिता में अंडर-21 वर्ग में हासिल की उपलब्धि

  3. सीआईएसएफ जवान अंशिका ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराया

जागरण संवाददाता, पठानकोट। पंजाब के पठानकोट जिले के गाँव बड़ा भनवाल की होनहार बेटी अंशिका भारद्वाज ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराते हुए इतिहास रच दिया है। जॉर्डन की राजधानी अम्मान में 8 से 11 सितंबर तक आयोजित 24वीं एशियाई कराटे चैंपियनशिप में अंशिका ने अंडर-21 महिला 68 किलोग्राम भार वर्ग में देश के लिए रजत पदक (सिल्वर मेडल) हासिल किया।

टूर्नामेंट के दौरान अंशिका ने असाधारण तकनीकी दक्षता और मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया। उन्होंने ईरान, जॉर्डन और सऊदी अरब जैसी मजबूत टीमों की प्रतिद्वंद्वियों को मात देकर फाइनल में जगह बनाई। कड़े खिताबी मुकाबले में सऊदी अरब की खिलाड़ी से हार का सामना करने के बाद उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

अंशिका के पिता भारतीय सेना में सेवारत हैं, जबकि उनकी माता एक शिक्षिका हैं। बचपन से ही घर में फौजी अनुशासन को देखकर बड़ी हुईं अंशिका ने 12वीं की पढ़ाई के साथ ही कराटे को अपना ध्येय बना लिया था।

उसने 10वीं बीएस एम एस डी राजपूत पब्लिक स्कूल सुजानपुर 12वीं महाराणा प्रताप सीनियर सेकेंडरी स्कूल भनवाल से की है 22 सितंबर 2025 को वे केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में भर्ती हुईं और वर्तमान में 6वीं बटालियन, गोवा में तैनात हैं।

अंतरराष्ट्रीय सफलता से पहले अंशिका ने नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित 5वीं केआईओ (KIO) सीनियर नेशनल कराटे चैंपियनशिप के -61 किग्रा वर्ग में देश भर के शीर्ष एथलीटों के बीच कांस्य पदक जीता था।

अंशिका की इस शानदार सफलता पर सीआईएसएफ बल, खेल प्रेमियों और पठानकोट में खुशी की लहर है। अंशिका ने साबित कर दिखाया है कि कड़े अनुशासन और निरंतर अभ्यास के दम पर किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें- पठानकोट में 200 फीट ऊंचे टावर पर बैठकर 11 दिन से धरना दे रहे दो बुजुर्ग, क्या हैं मागें?