जागरण संवाददाता, पठानकोट : नगर निगम के कर्मचारी एक बार फिर सड़कों पर उतरने की तैयारी में है। निगम के कर्मचारियों को दिसंबर माह का वेतन अभी तक नसीब नहीं हुआ है। जनवरी माह आधा बीत चुका है पर मुलाजिमों की तनख्वाह को लेकर कोई उम्मीद नहीं है कि कब खाते में राशि आएगी। पिछले करीब पांच महीनों से निगम के कर्मियों की ऐसी हालत है। करीब आठ सौ मुलाजिमों की निगम अपने ही लोगों का आर्थिक बोझ सहन नहीं कर पा रही है। वजह साफ है कि कमाई कम होना और खर्चे अधिक होना। पिछले महीने की तनख्वाह न मिलने पर कर्मचारी दो दिन पहले कमिश्नर को मांगपत्र भी सौंप चुके हैं। उम्मीद ऐसी नहीं दिख रही है कि उनको जल्द वेतन मिल पाएगा। ऐसे हालात में तनख्वाह पर निर्भर कर्मचारियों के लिए परिवार का खर्च करने के लिए हर माह कसरत करनी पड़ रही है। पिछले महीने की तरह कर्मचारियों का रोष अब सड़कों पर दिखने वाला है। निगम में कुल कर्मचारी : 785

- अधिकारी वर्ग : 20

- कर्मचारी वर्ग : 315

- पक्के : 335

- ठेके पर : 450 प्रतिमाह मानदेय की राशि : 90 लाख

- माह की आय कितनी है : लगभग 1 करोड़

- माह का खर्च अनुमानित : 1 करोड़ 5 लाख ऐसे हुआ जारी वेतन

- अक्टूबर माह का वेतन 28 नवंबर को मिला

- नवंबर माह का वेतन 20 दिसंबर को मिला

- दिसंबर का वेतन का अभी तक जारी नहीं

इनसे हो रहे विकास कार्य

पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड और 14वें वित्तायोग के सहयोग से विकास कार्य करवाए जाते हैं। यहां से बजट आने पर विकास कार्यों को करवाने का ही प्रावधान है। इस राशि को वेतन एवं अन्य सुविधाएं के लिए खर्च नहीं किया जा सकता। इसलिए मुलाजिमों को आय के स्त्रोतों पर ही निर्भर होकर रहना पड़ रहा है। निगम की आय के स्त्रोत

- बिल्डिग

- प्रॉपर्टी टैक्स

- वाटर सप्लाई

- रेंट

- लाइसेंस फीस

पार्षदों को भी मानदेय नहीं

मुलाजिमों के साथ ही मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों का भी कुछ ऐसा हाल है। करीब सात महीनों का उन्हें मानदेय जारी नहीं हो सका है। करीब एक करोड़ रूपये के धन की मानदेय जारी करने के लिए आवश्यकता है। मेयर, सीनियर डिप्टी मेयरों समेत 50 पार्षद भी मानदेय की आस में है। निगम के पास इसका बजट नहीं है और इसे टाला जा रहा है।

कर्मचारियों को मांगनी पड़ती है तनख्वाह : अश्वनी

नगर निगम कर्मचारी एसोसिएशन के प्रधान अश्विनी शर्मा ने कहा है कि पूरा माह सेवाएं देने के बाद भी तनख्वाह के लिए तरसना पड़ रहा है। कर्मचारी अपने हक के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं तो आम लोगों का क्या होगा। निगम की पूरी व्यवस्था कर्मचारियों के कंधों पर है। एक ऐसे स्थायी फंड का प्रावधान हो, जिससे कर्मियों का वेतन एवं अन्य सुविधाएं दी जा सकें। हर माह प्रदर्शन एवं नारेबाजी करने से कर्मचारी तंग आ चुके हैं। जीएसटी का पैसा न आने से दिक्कत : सूद

निगम के एडिशनल कमिश्नर अजय सूद का कहना है कि जीएसटी की बड़ी राशि का भुगतान अभी होना बाकी है। निगम के पास इस समय आय कम है, इसे पटरी पर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कर्मचारियों को भी इस बात का बारीकी से पता है कि निगम के पास बजट का अभाव है। दिसंबर माह का वेतन जल्द जारी करने की व्यवस्था बनाई जा रही है।

Posted By: Jagran

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