संवाद सहयोगी, घरोटा: यातायात साधन किसी भी क्षेत्र के आपस में संपर्क में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है। आजादी के 74 वर्ष उपरांत भी हलका भोआ के घरोटा ब्लाक के अनेकों ऐसे रूट है, जहां पर बस सेवा भी नसीब नहीं हुई है। समय की सरकारें बेशक विकास के दावे करती नहीं थकती, लेकिन हकीकत में इस विकास के युग में भी घरोटा-पठानकोट वाया वडाला कटारूचक्क रूट पर बस सुविधा नहीं है। इससे क्षेत्र के 30 के करीब गांव प्रभावित है। आज भी इस हाईटैक युग में लोग यहां पैदल व अपने साधनों पर जीने पर विवश है। अनेकों राज नेता कई बार इस रूट पर लोगों की सुविधा हेतु बस सेवा और यातायात साधन आरंभ करवाने के आश्वासन दे चुके है, लेकिन किसी ने भी इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया।

रविद्र काटल, कैप्टन रविद्र सिंह, दर्शन सिंह, जोगिद्र सलारिया, मंजीत मंजोत्रा, मास्टर राम कृष्ण, लक्की कुमार, जागीर सिंह, इंजीनियर जनक राज, तिलक राज, अवतार ने कहा कि वडाला, बस्सी बहलादपुर, बस्सी अफगाना, चौहान, भीमपुर, खन्नी खुई, मीलवा, वडाला, गुजरात, फरीदानगर, कुंडे फिरोजपुर, सैदोवाल, मुकीमपुर, कटारूचक्क, डिवकू, धलौरिया क्षेत्र के गांवो में कोई बस सेवा नहीं है। इसके चलते लोगों को ब्लाक मुख्यालय घरोटा के अतिरिक्त जिला प्रबंधकीय कांप्लेक्स मलिकपुर व पठानकोट जाने में भारी दिक्कते पेश आ रही है। वहीं क्षेत्र के बच्चों को स्कूल, कालेज जाने में परेशानी आ रही है। सामान्य वर्ग भी सालम आटो कर गंतव्य को रवाना हो रहे है। चुनावों के उपरांत भूल जाते हैं सब: भूपिद्र सिंह

भूपिद्र सिंह ने कहा कि चुनावों के समय हर बार बस सेवा उक्त रूट पर शुरू करने का मुद्दा रहता है, लेकिन चुनावों के उपरांत इसे ठंडे बसते में डाल दिया जाता है। इसका खमियाजा उक्त रूट पर पड़ते गांवों के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। कई बार मिला बस आश्वासन: बचन लाल

बचन लाल ने कहा कि कई बार बस सेवा शुरू करने का आश्वासन मिला है, लेकिन किसी ने भी आज तक बस सेवा को आरंभ नहीं किया। इससे ग्रामीण अपने को ठगा महसूस कर रहे है। कई किलोमीटर पैदल सफर तय करने को विवश: बलजीत राय

बलजीत राय ने कहा कि उनका क्षेत्र बस सेवा से वंचित है। लोग कई किलोमीटर पैदल चल कर हाईवे पर जा कर बस पकड़ने को विवश है। इसलिए जल्द मांग को पूरा किया जाए। लोग लंबे अर्से से उठा रहे मांग: पंकज पठानिया

पंकज पठानिया ने कहा कि लोग लंबे अर्से से उक्त रूट पर बस सेवा आरंभ करने की मांग उठा रहे है। लेकिन अभी तक समस्या का समाधान न होने से लोग विवशता भरा जीवन जीने को मजबूर है।

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