जागरण संवाददाता, पठानकोट : डेंगू का कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार शाम को आई रिपोर्ट के अनुसार 55 लोग डेंगू पाजिटिव मिले हैं। इसमें वीरवार के लिए गए सैंपल भी शामिल है। इतनी बड़ी संख्या में डेंगू के मरीज आने से विभाग सकते में हैं। उन्हें अब यह नहीं सूझ रहा है कि किस एरिया को रेड जोन में शमिल किया जाए, क्योंकि हर क्षेत्र से डेंगू के मरीज आ रहे हैं।

गौरतलब है कि वीरवार को सैंपल की जांच नहीं हो पाई थी। इसलिए शुक्रवार को इसकी जांच हुई। हैरानी बाली बात यह है कि शहरी इलाकों से ही सबसे ज्यादा मरीज मिल रहे हैं। इसके बाद भी निगम प्रशासन नहीं जाग रहा है। सेहत विभाग के अधिकारी का कहना है कि इसकी एक रिपोर्ट निगम को भी भेजी जाती है। इसके पहले भी निगम प्रशासन को शहर की सफाई के लिए कहा गया था। जहां पर पानी खड़ा है उसकी निकासी के लिए कहा गया था। फागिग करने के लिए भी कहा गया है। इसके बाद भी बड़े पैमाने पर डेंगू मरीज आ रहे हैं। सितंबर में ही 257 मरीज आ चुके हैं। 48 डेंगू मरीज हुए स्वस्थ

अब तक 48 डेंगू के मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं और बाकियों का इलाज चल रहा है। विभाग से मिली रिपोर्ट के अनुसार इस साल जनवरी से अब तक कुल 286 मरीज आ चुके हैं। साल, केस

2017 600

2018 150

2019 118

2020 78 (अक्टूबर तक)

2021 286 (अब तक) स्टाफ की कमी, एक कर्मचारी के भरोसे है जांच

डेंगू के आगे सरकारी व्यवस्था पूरी तरह से लाचार साबित हो रही है। संसाधनों की कमी और रिपार्ट में देरी के कारण मरीजों का सही समय पर सैंपल लेकर जांच नहीं हो पा रही है। इसलिए मरीज प्राइवेट अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं।

सितंबर में डेंगू के डंक से सेहत विभाग के अधिकारी भी चितित हैं। सिविल अस्पताल में हर रोज 25 से 30 मरीजों का टेस्ट किया जाता है, लेकिन हर रोज मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसलिए जांच करवाने के लिए अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। संसाधानों व स्टाफ की कमी के कारण सभी लोगों की जांच नहीं हो पा रही है। इस कारण सैंपल भी नहीं लिए जा रहे हैं। एक चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण जुकाम बुखार और टाइफाइड के मरीज भी आ रहे हैं। पहले जहां हर रोज करीब चार सौ ओपीडी होती थी आज 480 के करीब है। उन्होंने बताया कि रोजाना 250 से 300 मरीजों के अलग-अलग टेस्ट हो रहे हैं। डेंगू के लक्षण वाले मरीजों की संख्या पहले से ज्यादा है। अब तक 200 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। इन मरीजों की जांच सिविल अस्पताल के कमरा नंबर 37 में किया जाता है। यहां पर एक मशीन है। इस कारण जांच करने में परेशानी आ रही है। वहीं डेंगू वार्ड में एक ही स्टाफ दिन के समय रहता है। शाम को भी केवल एक ही स्टाफ की ड्यूटी लगी हुई है। कर्मचारी ने बताया कि इतने बड़े वार्ड को अकेले संभालने में काफी दिक्कत होती है। हालांकि उनके साथ कुछ विद्यार्थी मौजूद रहते हैं, जो कि उनका थोड़ा बहुत काम संभाल लेते हैं। फिर भी इतने बड़े वार्ड को संभालने में दिक्कत होती है। कम से कम दो या तीन स्टाफ मेंबर वहां पर सुबह और शाम को मौजूद रहने चाहिए, ताकि उन्हें काम करने में कोई दिक्कत ना आ सके एक स्टाफ के कंधों पर लैब

सिविल अस्पताल की लैब डेंगू टेस्ट के लिए सिर्फ कर्मचारी की ड्यूटी लगाई गई है। यहां मशीनें जरूर दो हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण सैंपलों की जांच नहीं हो पाती है। इससे सरकारी अधिकारी भी चितित है। स्टाफ की कमी के कारण ही जिस दिन उक्त लैब कर्मचारी छुट्टी पर होता है उस दिन जांच नहीं हो पाती। सिविल अस्पताल में डेंगू के 15 मरीज उपचाराधीन

शहर में डेंगू के चेकअप के लिए कुछ लोग अपना चेकअप प्राइवेट अस्पतालों से भी करवा रहे हैं। शहर में कई जगह डेंगू के सेंटर बनाए गए हैं, जिसमें से शहर के छाबड़ा अस्पताल में डेंगू के कई मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज चल रहा है। कई प्राइवेट लेबोरेटरी में भी लोग अपना डेंगू टेस्ट करवा रहे हैं। सिविल अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि कार्ट टेस्ट बिल्कुल भी मान्य नहीं है। प्लेटलेट्स या ब्लड की कमी नहीं

बीटीओ डाक्टर माधवी अत्री का कहना है कि फिलहाल यहां प्लेटलेट्स की कोई कमी नहीं है। ब्लड डोनेशन कैंप चल रहे हैं, जिसके कारण वहां ब्लड की कोई कमी नहीं आ रही है । उन्होंने बताया कि अभी वह दो कैंप और देखेंगे और 15 दिन के बाद रिपोर्ट करेंगे कि अगर ब्लड की कमी आई है तो वह अपने अधिकारी को बताएंगे ।

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