जागरण संवाददाता, नवांशहर: नरोआ पंजाब संस्था के सरपरस्त बरजिदर सिंह हुसैनपुर ने पंजाब सरकार को पत्र लिख कर मांग की है कि किसान आंदोलन के संघर्ष और इस दौरान जान गंवाने वाले किसानों, मजदूरों को समर्पित यादगार बनाई जाए। यदि यह यादगार जिला शहीद भगत सिंह नगर में बनाई जाती है, तो जमीन उनकी तरफ से सेवा के रूप में दी जाएगी। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को भेजे पत्र में लिखा गया है कि केंद्र सरकार की तरफ के पास किए तीन खेती कानून रद्द करवाने के लिए देश के किसानों मजदूरों की तरफ से किया संघर्ष सिर्फ हमारे देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मिसाल है। इस दौरान पंजाब के किसानों, मजदूरों और ओर जत्थेबंदियों ने सामूहिक तौर पर सिक्खी और पंजाबियत की भावना का प्रकटावा किया। इस दौरान 700 के करीब किसान, मजदूरों ने जान गंवाई है। इस महान संघर्ष और कुर्बानियों को याद रखने के लिए एक विश्व स्तरीय यादगार बनाने की जरूरत है, जिससे न सिर्फ पंजाब या भारत के बल्कि पूरी दुनिया के लोग इससे प्रेरणा ले सकें। हुसैनपुर ने सुझाव दिया है कि इस यादगार में किसान संघर्ष के हर पहलू को चित्रकारी, किताबी और डिजिटल रूप में पेश करके संभाला जाए। इस यादगार के लिए देश के हर गांव से नाम मात्र मिट्टी और अन्य सामान ले कर इस्तेमाल किया जाए, जिससे किसान, मजदूर एकता की सशक्त सांझ का दिखावा हो सके और हमेशा के लिए रह सके। यादगार बनाने के लिए बनाई जाने वाली कमेटी, ट्रस्ट या संस्था में किसान आंदोलन में नेताओं को शामिल किया जाए और उनका सहयोग लिया जाए। इसलिए अब से ही जान गंवाने वाले किसानों और उनके परिवारों संबंधी जरूरी आंकड़े इकठ्ठा करने के लिए जरूरी दिशा निर्देश संबंधी अधिकारियों को जारी कर दिए जाने चाहिए। पत्र के अंत में लिखा गया है कि मैं एक सिक्ख, पंजाबी और किसान होने के नाम पर नम्रता सहित विनती करते हैं कि यह यादगार जिले में बनाई जाए। इस यादगार के लिए अपेक्षित •ामीन हम नम्रता सहित अपने तरफ से देने के लिए तैयार हैं। यदि हमें सेवा का यह मौका मिले तो गुरू की इस बख्शीश के लिए हमारे बड़े भाग होंगे। यहां बताने योग्य है कि बरजिदर सिंह हुसैनपुर नवांशहर इलाके में बड़े स्तर पर शिक्षा, खेल और वातावरण के लिए काम किए जा रहे हैं। उनकी तरफ से नवांशहर का स्पेशल बच्चों के लिए स्कूल का सारा खर्चा अपनी तरफ से किया जा रहा है। 100 सरकारी स्कूलों में एक-एक वालंटियर अध्यापक अपने तरफ से रखा जा रहा है। उनकी तरफ से गांवों की पंचायतों को न्योता दिया गया है कि वह अपने गांवों में पुस्तकालय खोलने के लिए संकल्प डालने, जरूरी किताबें उनके द्वारा उपलब्ध करवाई जाएंगी। उनकी टीम की तरफ से इलाके में 25000 पौधे भी लगाए गए हैं और टूर्नामेंट की लड़ी भी चलाई जा रही है। हुसैनपुर ने बताया कि सेवा के यह सभी काम उनके परिवार की तरफ से लिए फैसले मुताबिक किए जा रहे हैं।

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