जगदीश लाल कलसी, बंगा: करवाचौथ व्रत को लेकर शहर सज गए हैं। चूड़ी, बिदी व श्रृंगार का सामान बेचने वालों ने दुकानें सजा ली हैं। इसके अलावा कपड़े की दुकानों पर भी रौनक बढ़ने लगी हैं। शहर में मिठाई की दुकानों पर फैनियां, मट्ठियां तथा रंग-बिरंगी मिठाई करवाचौथ को लेकर बनना शुरू हो गई है। शहर के मुख्य बाजार मनियारी बाजार, पटेल चौक, घाटी बाजार में मेहंदी लगाने वालों के स्टाल लगे हुए हैं। मनियारी का कारोबार करने वाले अवधेश कुमार का कहना है कि बाजार में कांच की चूड़ी 50 रुपये से लेकर 150 रुपये दर्जन तक मिल रही है। इसमें आगरा की चूड़ी का खास महत्व है। बेशक आजकल की महिलाएं मेटल की चूड़ियां पहनना पसंद करती हैं, मगर करवाचौथ के मौके पर कांच की चूड़ियां पहनना शुभ शगुन माना जाता। नवविवाहिता महिलाएं तथा जिन लड़कियों की एंगेजमेंट हो चुकी है, उनमें करवाचौथ की तरफ ज्यादा रुझान है। वहीं बंगा के ज्योतिषी तथा ज्योतिष अलंकार से पुरस्कृत पंडित प्रदीप शर्मा ने बताया पौराणिक कथा के मुताबिक छह भाइयों की बहन चंद्रावती ने अपने पति की रक्षा के लिए व्रत किया था, जिस व्रत में उन्होंने भगवान शिव-पार्वती की अराधना की तथा गणपति जी को विशेष रूप में अपने उपवास के दौरान कृपा करने के लिए आमंत्रण करके उनकी भी साधना की। इससे चंद्रावती के पति को पुनर्जीवन प्राप्त हुआ। इसीलिए सभी महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए निराहार व्रत धारण करने लगीं, जिसमें वह मिट्टी के बर्तन में जल भरकर रखती है तथा रात्रि को करवाचौथ व्रत कथा किसी ब्राह्मण से सुनकर चांद को अ‌र्घ्य देती हैं तथा अपने सुहाग के सामान तथा मिठाई भेंट करती है । पंडित प्रदीप शर्मा कहते हैं कि कल रविवार को महिलाएं रात्रि सवा आठ बजे के बाद चांद के दर्शन कर अपना व्रत खोल सकेंगी तथा पति के हाथों पानी पीकर अन्न ग्रहण करें।

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