जेएनएन, चंडीगढ़। कांग्रेस के पूर्व सांसद जगमीत सिंह बराड़ आखिरकार शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए। पार्टी प्रधान सुखबीर बादल बराड़ के मुक्तसर स्थित आवास पर उन्हें पार्टी में शामिल करवाने के लिए पहुंचे। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी इस मौके पर पहुंचे।

अकाली दल में शामिल होने के दौरान जगमीत सिंह बराड़ काफी खुश नजर आए। वह अकाली नेताओं से गले मिलते दिखे। बता दें, बराड़ के पिता गुरमीत सिंह बराड़ शिरोमणि अकाली दल के सीनियर नेता रहे हैं जिनका फरीदकोट जिले में अच्छा खासा राजनीतिक आधार था। लेकिन, उनकी मौत के बाद बादल और बराड़ परिवार में दूरियां बढ़ गईं। जगमीत बराड़ जो उस समय अकाली दल की वर्किंग कमेटी के सदस्य थे, ने अपने पिता की मौत के लिए प्रकाश सिंह बादल को जिम्मेवार ठहराया और पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए। प्रकाश सिंह बादल व सुखबीर बादल निजी तौर पर जगमीत बराड़ के निशाने पर रहे।

बराड़ हर स्टेज पर प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ भड़ास निकालते रहे हैं, लेकिन जैसा कि कहा जाता है कि राजनीति में कोई न तो स्थायी दोस्त होता है और न ही स्थायी दुश्मन। इसका जीता जागता उदाहरण आज मुक्तसर में दिखा। दरअसल बराड़ और बादल परिवार दोनों को एक-दूसरे की जरूरत है। शिरोमणि अकाली दल जहां पिछले दो साल से अपने पंथक वोट को गंवाने के कारण हाशिए पर चला गया है, वहीं जगमीत बराड़ लगभग तमाम पार्टियों से निराश होकर पिछले लंबे समय से खाली बैठे थे। पार्टी के एक सीनियर नेता ने कहा, यह दोनों के लिए ही अच्छा है। मुझे यह एक अच्छी शुरुआत लगती है।

बराड़ ने किए तीन ट्वीट

जगमीत बराड़ ने गत दिवस तीन ट्वीट करके अपनी नई पारी की शुरुआत करने के बारे में अपने समर्थकों को जानकारी दी। उन्होंने लिखा- मैं लोगों के राजनीतिक जीवन में हूं। अकाली दल ने मुझे सिखिज्म और पंजाब के लोगों की सेवा के मेरे लक्ष्य को पूरा करने का अवसर दिया है। मैं पहले की तरह लोगों के मुद्दे उठाता रहूंगा। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, मैं अपनी निजी और राजनीतिक क्षमता में गुरु नानक साहिब के सदाचार और सिद्धांतों पर चलता रहा हूं। इसलिए मैं अपने सभी समर्थकों को बताना चाहता हूं कि मैं शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो रहा हूं।

सियासी करियर

  • 1992 में 10वीं लोकसभा व 1999 में 13वीं लोकसभा के सदस्य रहे।
  • 1979-80 में तत्कालीन अकाली सरकार के खिलाफ आंदोलन के कारण जेल में गए। ।
  • बराड़ 1979 में कांग्रेस में शामिल हुए। 1984 से 1989 तक ऑल इंडिया यूथ कांग्रेस के महासचिव रहे।
  • 1995 से लेकर 2004 तक ऑल इंडिया कांग्रेस समिति के सचिव रहे।
  • 2013 तक पांच वर्ष कांग्रेस के विशेष आमंत्रित सदस्य और चार वर्ष तक स्थायी सदस्य रहे।

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