सत्येन ओझा.मोगा

कोरोना संक्रमण का दूसरा दौर पहले से ज्यादा तेजी के साथ फैल रहा है। स्कूल फिर से बंद कर दिए गए हैं, 12 अप्रैल से आनलाइन पढ़ाई शुरू हो रही है। फिर से लगातार मोबाइल स्क्रीन पर बच्चों की नजर रहेगी, पेरेंट्स चितित हैं, स्कूल न जाने से बच्चों की दिमागी स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है क्योंकि स्कूल में बच्चों को खुशी उन्हें मिलती है, खेलते हैं वह सब घर में नहीं हो पाता है। आनलाइन पढ़ाई से आंखें लगातार मोबाइल की स्क्रीन पर रहती हैं, जिससे आंखों पर भी दुप्रभाव सामने आते हैं।

ऐसे में डायटीशियन पायल धवन बता रही हैं कि कैसे मौसमी फलों से हम अपनी इम्युनिटी ही बूस्ट नहीं कर सकते हैं बल्कि आंखों को भी स्वस्थ रख सकते हैं। क्योंकि कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए बहुत सारी बंदिशों की चुनौतियों का सामना तो करना ही पड़ेगा, अन्य कोई उपाय है नहीं। मौसमी फलों का करें सेवन

डायटीशियन पायल धवन का कहना है कि तरबूज और खरबूजे का मौसम आ रहा है। इन अधिक से अधिक सेवन करें। ये दोनों ही फल इम्युनिटी को बढ़ाते हैं, इनमें मिनरल्स की भरपूर मात्रा होती है। दिमाग की सुस्ती और कमजोरी को दूर करता है, शक्ति बढ़ाता है। इसके साथ ही श्वास के रेग, हिचकी और कफ को कम करता है, हृदय की कमजोरी भी ये फल दूर करते है। हीमोग्लोबिन बढ़ाकर एनीमिया का खतरा दूर करता है। खरबूजे में ढेर सारे मिनरल्स और एंटी आक्सिडेंट्स पाए जाते हैं। खरबूजे से फैट कम होता है। कार्बोहाइड्रेट व फाइबर की मात्रा भी खूब होती है। खरबूजे में विटामिन ए और विटामिन सी आंखों को स्वस्थ रखता है।खरबूजे में एडिनोसिन होता है, जो शरीर में खून को पतला करता है।

कीवी भी है लाभदायक :

कीवी भी मौसमी फल है, इसमें भरपूर विटामिन सी व एंटी-आक्सीडेंट पाए जाते हैं। कोलेस्ट्राल लेवल के लिए कीवी कोलेस्ट्राल को नियंत्रित करने में सहायक है. कीवी में इन्फ्लेमेटरी गुण पाया जाता है। कीवी में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है। पपीता विटामिन सी , एंटी आक्सिडेंट्स व फाइबर भरपूर होता है जो वजन को रखे नियंत्रित करता है। आंखों की स्वस्थ रखता है। साथ ही इम्युनिटी बूस्ट करता है इसके अलावा सेब का भी सेवन कर सकते हैं। पैरेंट्स को सता रही है चिता

आरकेएस स्कूल में अध्यापिका मिन्नी चहल 13 वर्षीय बच्चे की मां भी हैं। स्कूल दोबारा बंद होने से पैरेंट्स की चिता स्वाभाविक है। घर में लगातार बच्चे के रहने व आनलाइन पढ़ाई करने से बच्चों की आंखों पर विपरीत असर पड़ने को लेकर बेहद चितित हैं। उन्होंने अपनी ये चिता फेसबुक पर लाइव होकर भी जताई जिसे पिछले दो दिनों में ही बड़ी संख्या में पैरेंट्स ने लाइक भी किया है और शहरवासियों ने भी।

क्या कहते हैं नेत्र रोग विशेषज्ञ

मथुरादास सिविल अस्पताल से सेवानिवृत्त नेत्र रोग विशेषज्ञ डा.राजेश पुरी का कहना है कि लगातार आनलाइन शिक्षा से आंखों पर जोर पड़ना स्वाभाविक है, ऐसे में पैरेंट्स को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। वे बच्चों को बताएं कि हर पंद्रह मिनट पर एक मिनट का ब्रेक दें, लगातार स्क्रीन पर न देखें, पलक झपकाते रहें। मौसमी फल व हरी सब्जियां ज्यादा उनके भोजन में शामिल करें। मनोरोग विशेषज्ञ डा. राधिका की राय

हाल ही में डा.प्रेम मल्टी स्पेशलिटी हास्पिटल में मनोरोग विशेषज्ञ के रूप में ज्वाइन करने वाली मनोचिकित्सक डा.राधिका का कहना है कि कोरोना से लड़ने के लिए चुनौतियां स्वाभाविक रूप से आएंगे। बच्चे घरों में हैं तो माता-पिता के लिए फिर से मौका है उनके साथ ज्यादा समय बिताएं, बातें करें। हो सके तो प्रेरक कहानियां सुनाएं, ताकि बच्चे जो अपने सहपाठियों के साथ स्वाभाविक आनंद महसूस करते हैं वह घर के माहौल में पा सकें। योग कराने में मदद करें। सुबह शाम टहलने जाएं, कोरोना के नियमों का पालन करते हुए बच्चों को भी साथ में रखें, जिससे बच्चे निराशा व अवसाद की स्थिति से बच सकते हैं।