सत्येन ओझा.मोगा

शहर के होटलों में चल रहे चकलाघरों की सफाई व खनन माफिया के खिलाफ लगातार कार्रवाई करने वाले एसएसपी धु्रमन एच निंबले का दो महीने का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही तबादला कर दिया गया। उन्हें अब एआइजी काउंटर इंटेलीजेंस एवं ओसीसीयू मोहाली के पद पर तैनात किया गया है। उनके स्थान पर पीपीएस अधिकारी सुरिदर जीत सिंह मंड को मोगा का नया एसएसपी नियुक्त किया गया है।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि होटलों में चल रहे चकलाघर के मामले में एक बड़े नेता के बेहद करीबी के खिलाफ एसएसपी को काफी सुबूत मिल गए थे। एसएसपी कुछ दिन और रहते तो उसके खिलाफ एफआइआर दर्ज होनी तय थी। होटलों में छापामारी वाले दिन ही तय हो गया था कि एसएसपी ज्यादा दिन नहीं टिक पाएंगे। क्योंकि वे टिकते तो बड़े नेता का राजनीति में टिक पाना मुश्किल हो जाता।

गौरतलब है कि ध्रुमन एच निबले 21 अगस्त को मोगा का एसएसपी नियुक्त किया गया था। 25 अगस्त को उन्होंने पदभार संभाला था। निबले पदभार संभालते ही एक्शन मोड में आ गए थे। आठ सितंबर को उन्होंने अपने सरकारी आवास पर एक सांप का फन पकड़कर अपने इरादे जाहिर कर दिए थे कि वे सिर्फ बिलों में रहने वाले सांप को ही नहीं, समाज में विचरने वाले सांपों को ही पकड़ने में माहिर हैं। निंबले ने सबसे पहले सतलुज दरिया किनारे चल रहे रेत के अवैध खनन के खिलाफ मोर्चा खोला था। पहले ही दिन मौके से आठ लोगो को गिरफ्तार कर दो करोड़ रुपये से ज्यादा की मशीनरी जब्त की। पोपलेन मशीन, जेसीबी आदि कब्जे में ले ली थी। एक जुलाई से 30 सितंबर तक खनन बंद होने के बावजूद मशीनें मौके पर क्यों मौजूद थीं, इसका जबाव आज तक नहीं मिल सका। खनन की अवधि में भी एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार पोपलेन मशीन, जेसीबी आदि का माइनिग के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता है। सात मार्च 2018 को जब तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिदर सिंह ने नवांशहर में हवाई निरीक्षण कर कार्रवाई की थी, उस समय भी जिन साइट पर कार्रवाई की गई थी, वो साइट वैध थी, लेकिन वहां पर मशीनरी से खनन अवैध था।

एसएसपी की इस कार्रवाई से आहत खनन माफिया ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इसी बीच एसएसपी ने शहर के होटलों में चल रहे देह व्यापार के धंधे के खिलाफ मोर्चा खोला तो सियासी मैदान में तूफान खड़ा हो गया था। उसी दिन से स्थानीय राजनीति में तूफान खड़ा हो गया था। क्योंकि इन होटलों से पुलिस अधिकारियों व सियासी लोगों को मोटी राशि हर महीने सरंक्षण के लिए दी जाती थी। एसएसपी ने इसीलिए होटलों के खिलाफ आपरेशन में डीएसपी सिटी, थाना सिटी-एक के प्रभारी व थाना सिटी-दो के प्रभारी को पूरी कार्रवाई से अलग रखा था। छापे में जो सच्चाई सामने आई, उसे देख एसएसपी ने डीएसपी सिटी व दोनों थानों के प्रभारियों को खूब खरी-खोटी भी सुनाई थीं। छापे के बाद चकलाघर की मोटी कमाई हाथ से खिसकते देख उसी दिन से मुख्यमंत्री के दरबार में एसएसपी ध्रुमन के खिलाफ लामबंदी शुरू कर दी गई थी। खनन माफिया पहले से नाराज था, ऐसे में दोनों ही खेमे एसएसपी के खिलाफ लामबंद हो गए थे। ध्रुमन को 25 अक्टूबर को दो महीने पूरे होने थे, उससे पहले ही उनका तबादला करा दिया। आरोपों से बचने के लिए ध्रुमन का तबादला आदेश सामूहिक रूप से हुए तबादला आदेश के साथ ही किया गया, ताकि सियासी लोग ये कहकर अपना दामन छुड़ा सकें कि ये तबादला तो रुटीन में हुआ था। नहीं मिलेगा ज्यादा फायदा

सूत्रों के अनुसार पीपीएस अधिकारी को एसएसपी के रूप में नियुक्ति दिलाने वाले राजनीतिज्ञों को चुनाव में ज्यादा फायदा नहीं मिलने वाला है। सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आचार संहिता लागू होते ही फिर नए एसएसपी के रूप में आइपीएस अधिकारी की नियुक्ति होगी। देखना ये है कि क्या नए एसएसपी के कार्यकाल में होटल व खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई में राहत मिलेगी, ऐसा हुआ तो विपक्ष को कांग्रेस के खिलाफ हमला करने का बड़ा मुद्दा मिल जाएगा।

Edited By: Jagran