जागरण संवाददाता.मोगा

आम आदमी पार्टी (आप) की विधायक डा.अमनदीप कौर अरोड़ा व गांव मोठावाली के सरपंच हरनेक सिंह विवाद में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने डीजीपी पंजाब और डिवीजनल कमिश्नर फिरोजपुर के जरिए डीसी मोगा व एसएसपी मोगा के नाम जारी नोटिस में सात बिंदुओं पर आधारित जवाब 15 दिन के अंदर मांगा है। पता चला है कि अनुसूचित जाति के सरपंच की नाबालिग बेटी को थाने लाने के मामले को मुख्यमंत्री ने भी गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन के माध्यम से अपनी नाराजगी व्यक्त की है। आयोग से यह शिकायत की

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से गांव मोठावाली के सरपंच हरनेक सिंह की पत्नी रणजीत कौर की ओर से की गई शिकायत में कहा गया है कि उनके पति राजनीतिक रूप से भाजपा नेता डा.हरजोत कमल के साथ संबंध रखते हैं। राज्य में सत्ता बदलने के बाद आम आदमी पार्टी से संबंधित मौजूदा पंच गुरप्रीत सिंह गोगी, पंच सुखदेव सिंह व निरंजन सिंह निजा पंचायत पर कब्जे को लेकर उनके पति हरनेक सिंह को जाति सूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित करते हैं , साथ ही धमकियां भ्ीा देते हैं। उन्हें यहां तक धमकियां दी जा रही हैं कि सरपंची छोड़ दे अन्यथा उन पर झूठा पर्चा डाल दिया जाएगा। 18 मई को भी गांव में विधायक के आने पर सरकारी जमीन पर उनका कब्जा बताकर उन्हें धमकियां दी गईं, जबकि उनका तो किसी भी जमीन पर कब्जा नहीं है। कब्जा किसी और का है,लेकिन उन पर बिना वजह दबाव बनाया जा रहा है। उसी दिन पुलिस उनके पति, बेटे व नाबालिग बेटी को थाना सदर में उठाकर ले गई, उनके खिलाफ झूठी रिपोर्ट थाने में दर्ज करा दी थी। महिला रणजीत कौर ने इंसाफ की गुहार लगाई थी। उन्होंने थाना सदर में भी शिकायत दी थी कि लेकिन थाना सदर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। पीड़ित इंसाफ की गुहार लगाई थी।

थाने में विधायक के पीए की ओर से सरपंच व उसके बेटे द्वारा विधायक से बदसलूकी करने के आरोप में केस दर्ज करवाया गया था।

इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के शोध अधिकारी एपी गौतम के हस्ताक्षर से जारी नोटिस में घटना वाले दिन का ब्यौरा, आरोपितों के नाम पते, सभी आरोपितों के नाम, किस तिथि में एफआइआर दर्ज की गई, कितने आरोपितों की गिरफ्तारी की गई आदि की जानकारी देने के साथ ही ये भी पूछा गया है कि पीड़ित महिला को कितना मुआवजा दिया गया है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से 18 मई को गांव मोठावाली के सरपंच हरनेक सिंह की पत्नी रणजीत कौर की ओर से शिकायत की गई थी। आरोप है कि विवाद के बाद पुलिस ने गांव के सरपंच हरनेक सिंह, उसके बेटे सतपाल सिंह व नाबालिग बेटी को घर से उठाकर थाने ले आए थे। इस मामले को लेकर पुलिस के खिलाफ आक्रोश भड़कने पर सरपंच की नाबालिग बेटी को थाने से छोड़ दिया था, जबकि सरपंच व उसके बेटे को गिरफ्तार कर अगले दिन अदालत में पेश किया था, जहां से उन्हें जेल भेज दिया था। इस मामले में सरपंच की जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई होनी है। पुलिस इस मामले में सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में एफआइआर दर्ज कर पहले ही विवादों में घिर चुकी है, क्योंकि विधायक के पास सीधे कार्रवाई करने का अधिकार ही नहीं है, इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन स्पष्ट है। सरपंच की नाबालिग बेटी को थाने उठा ले जाने के मामले में आयोग के नोटिस से थाना सदर पुलिस का संकट और ज्यादा बढ़ सकता है।

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