यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 28, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मंडी के तंबुओं में जिस्मफरोशी का धंधा... लड़की बोली- नशे की गोली दो फिर मेरे साथ कुछ भी कर लो, रूह कंपाने वाली आपबीती
एक किशोरी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि कैसे उसे नशे की लत लगाकर देह व्यापार में धकेला गया। ...और पढ़ें

HighLights
- महिला की ओर से नशे व जिस्मफरोशी की दलदल में धकेली गई युवती।
- समाज सेवी संगठन को सड़क किनारे चिंताजनक हालत में मिली किशोरी।
- अनाज मंडी में तंबुओं में होती है जिस्मफरोशी, कई युवतियां शिकार।
जागरण संवाददाता, मोगा। ‘मुझे बस नशे के लिए छह कैप्सूल चाहिए और उसके बाद कोई मेरे साथ कोई कुछ भी करे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। महिला ने पहले मुझे नशे की लत लगाई और मुझे अब जिस्मफिरोशी में धकेल दिया है।
वह मुझे ही नहीं, मेरे जैसी कई युवतियों को हवस के भूखे भेड़ियों के समक्ष परोसती है और बदले में तीन सौ रुपये लेती है। आधा हिस्सा डेढ़ सौ रुपये मुझे मिलते हैं। पहले छह से सात सौ रुपये की कमाई होती थी पर अब जो पैसा मिलता है, उससे केवल नशे की पूर्ति हो पाती है।’
नशे की आदी है किशोरी
कोट ईसे खां के मसीतां रोड की रहने वाली किशोरी ने जब बिना शर्म ये बातें कहीं तो वहां उपस्थित हर व्यक्ति के पांव के तले से जमीन खिसक गई। हुआ यह कि नशा विरोधी कमेटी कस्बे में गत दिवस मार्च निकाल रही थी। कमेटी के अध्यक्ष सुखदीप सिंह ने बताया कि मार्च के रास्ते में एक युवती नीचे बैठी खाना खाती दिखी।
उसकी हालत बेहद चिंताजनक थी। उससे बात करने के बाद उसके घर पहुंचाया गया। सुखदीप सिंह ने बताया कि आज मंगलवार को जब वह किशोरी के घर पहुंचे और उससे बातचीत की तो पता चला कि वह पिछले दो वर्ष से नशा करने की आदी हो चुकी है।
उसे मनजीत कौर नामक एक महिला ने नशे की लत लगाई और बाद में उसे जिस्मफिरोशी के धंधे में धकेल दिया।
जिस्म की लगती है बोली
किशोरी ने एक और चौंकाने वाली बात यह बताई कि अनाज मंडी में कुछ तंबू लगे हुए हैं जहां नशा करवाकर युवतियों के जिस्म के सौदे की बोली लगती है। इस पूरे मामले की शिकायत नशा विरोधी कमेटी ने किशोरी को थाने ले जाकर वहां दर्ज करवा दी है और पुलिस का कहना है कि वह इस पर अंकुश लगाएगी। किशोरी को जनेर गांव के नशा छुड़ाओ केंद्र में भर्ती कराया गया है।
सरकारी अस्पताल के पास मिलती है ‘बुपरीमार्फिन’ की गोली
किशोरी ने बताया कि जब उसे कैप्सूल नहीं मिलता है तो वह सरकारी अस्पताल से मिलने वाली ‘बुपरीमार्फिन’ गोली पानी में मिलाकर इंजेक्शन लगा लेती है। उसने बताया कि सरकारी अस्पताल के पास ही एक मेडिकल स्टोर है जहां नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाले गोली पचास से अस्सी रुपये में मिलती है।
उसने बुपरीमार्फिन गोली का इंजेक्शन लगाना भी उक्त महिला से ही सीखा था। किशोरी के अनुसार वह 17 वर्ष की है, उसकी एक बहन और भाई भी है। उसके पिता की मौत हो चुकी है और उसका भाई भी नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाली दवा का सेवन करता है।
वह कहती है कि वह अपने भाई समेत नशा छोड़ना चाहती है पर घर चलाने के लिए उसे यह सब कुछ करना पड़ रहा है।
डीसी से लेकर पुलिस प्रशासन तक पर बड़े सवाल
इस घटनाक्रम के बाद से डिप्टी कमिश्नर कार्यालय से लेकर एसएसपी कार्यालय सवालिया निशानों के घेरे में है। डिप्टी कमिश्नर ने नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाले विशेष किस्म से कैप्सूल पर प्रतिबंध लगाया हुआ है पर फिर भी जिले के कस्बों में यह कैप्सूल लगातार बिक रहे हैं।
दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने में नाकाम रहा है। यही नहीं, कोट इसे खां जैसे छोटे से कस्बे में नशा करवाकर जिस्मफिरोशी करवाई जा रही है तो पुलिस का खुफिया तंत्र व थाने की पुलिस पर भी सवाल उठना लाजिमी है।
