सत्येन ओझा, मोगा। मानवता की सेवा की ललक हो तो आप किसी भी दुनिया में हों, कर ही दिखाते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण पेश किया है, साल 2014 में मिसेज पंजाबन रह चुकीं जस ढिल्लों ने। अपनी ग्लैमरस दुनिया में रहकर भी अभावग्रस्त बच्चों में ज्ञान का प्रकाश बिखेर रही हैं, एक एकड़ क्षेत्र में बने अपने फार्म हाउस को उन्होंने गुरुकुल का रूप से दिया है, यहां हर दिन 40 से ज्यादा बच्चे पढ़ने आते हैं।

समाजसेवा के क्षेत्र में मिसाल पेश करने वाली जस ढिल्लों का कहना है कि भले ही वे स्कूल जीवन से लेकर होने के बाद तक ग्लैमर की दुनिया में रहीं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेती रहीं, फैशन शो का हिस्सा आज भी बनती हैं. लेकिन बच्चों को पढ़ाने का शौक उन्हें शुरू से ही था। शादी के बाद से ही घर में जब भी समय मिलता था, आसपास के जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया।

कोरोना काल के बाद पिछले साल सरकारी स्कूल में पति कंप्यूटर अध्यापक हरजीत सिंह ने करीब डेढ़ साल पहले घर के निकट ही एक एकड़ क्षेत्र में फार्म हाउस बनबा दिया तो जस को लगा मानों उन्हें मन की मुराद मिल गई हो, उन्होंने फार्म हाउस में ही बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले जरूरतमंद पहली कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक के करीब 40 बच्चे नियमित रूप से उनके फार्म हाउस में पढ़ने आ रहे हैं।

शाम के समय वहां हर विषय की कक्षा लगती है। जस ढिल्लों के इस प्रयास से प्रभावित होकर बैंक मैनेजर विकास शर्मा प्लस-1 व प्लस-2 के विद्यार्थियों को गणित पढ़ाने आते हैं। वे भी पूरी तरह निशुल्क बच्चों को पढ़ाते हैं। जस की इस मुहिम में शामिल होकर हरप्रीत इंगलिश पढ़ाते हैं, जबकि नवनीत कौर भी बच्चों को पढ़ाती हैं। फार्म हाउस के एक हिस्से में क्रिकेट पिच बनाई तो एक हिस्से में बैडमिंटन कोर्ट भी बनाया जस ढिल्लों बताती हैं कि फार्म हाउस पिछले साल जब बन रहा था, तब उन्होंने फार्म हाउस के मेन गेट पर ही लाइब्रेरी शुरू की थी, जिसमें बच्चों के प्रिय कामिक व ज्ञान की पुस्तकों का भंडार है।

ये पुस्तकें बच्चों को पूरी तरह निशुल्क घर पर पढ़ने को दी जाती हैं। ताकि मोबाइल की दुनिया से बाहर निकलकर बच्चे फिर से किताबों की दुनिया में जाकर अपने आत्मविश्वास को बढ़ा सकें। वर्तमान में लाइब्रेरी में 200 से ज्यादा पुस्तकें उपलब्ध हैं। इसके साथ ही उन्होंने फार्म हाउस के एक हिस्से में क्रिकेट पिच और एक हिस्से में बैडमिंटन कोर्ट भी बनाया है, ताकि बच्चे खेल सकें।

जस के शौक को देख उनके पति सरकारी अध्यापक भी उन्हें पूरी तरह मदद करते हैं। खास बात ये है कि जस के इस स्कूल में हर शनिवार को बाल सभा होती है, बाल सभा में विभिन्न प्रकार की गतिविधियां, सांस्कृतिक, खेलकूद आदि कराए जाते हैं। ताकि पढ़ाई के साथ-साथ बच्चे दूसरी गतिविधियों में भाग लेकर अपनी प्रतिभा को निखार सकें एवं तनाव मुक्त हो सकें।

Edited By: SATYANARAYAN OJHA

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