जागरण संवाददाता.मोगा

शहर में करीब एक दर्जन इलाकों में लोहे के गेट लगाकर सरकारी रास्तों को बंद कर दिया गया है। नगर निगम अधिकारियों की अनदेखी के चलते लोगों ने अब परवाना नगर की गली नंबर दो, गुरुरामदास नगर, किशनपुरा मोहल्ले में तो कुछ सड़कों पर ताले लगाकर सरकारी सड़कों पर ही कब्जे कर लिए हैं।

ज्यादातर रास्तों को रात नौ बजे से लेकर 10 बजे तक आम लोगों के लिए बंद कर दिये जाते हैं, शहर के मुख्य रास्ते बंद होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस मामले में परवाना नगर के लोगों की शिकायत पर निगम कमिश्नर सुरिदर सिंह ने एटीपी को मौके पर जाकर मामले की जांच के आदेश दिए थे लेकिन आदेश के 14 दिन बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस संबंध में एटीपी हरविदर सिंह का कहना है कि स्टाफ की कमी के चलते मौके पर निरीक्षण नहीं हो सका है, एक दो दिन में निरीक्षण के बाद जांच रिपोर्ट निगम कमिश्नर को सौंप दी जाएगी।

क्या है मामला

गौरतलब है कि शहर की गीता कालोनी, न्यू गीता कालोनी, फ्रैंड्स कालोनी, किशनपुरा मोहल्ला, परवाना नगर, वेदांत नगर आदि क्षेत्र में लोगों ने अपनी निजी सुरक्षा के लिए सरकारी रास्तों पर लोहे के गेट लगाकर उन्हें बंद कर दिया है। अधिकांश स्थानों पर रात को दस बजे तक लोहे के गेटों को ताला लगाकर बंद कर दिया जाता है। उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के पास चाबियां होती हैं या गली में एक स्थान पर बैठे चौकीदार का नंबर होता है, जिससे उन्हें आने जाने में परेशानी नहीं होती है, लेकिन आम लोगों को थोड़ी सी दूर के लिए कई कई किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है।

पूर्व मेयर अक्षित जैन की अध्यक्षता वाली नगर निगम में इस समस्या के समाधान के लिए हाउस में प्रस्ताव लाकर ये प्रावधान किया गया था कि जिन रास्तों पर ही लोहे के गेट लगाए गए हैं वहां की एसोसिएशन रास्ते के दोनों और चौकीदार तैनात करेंगे, रात 11 बजे से पहले गेट बंद नहीं हो सकेंगे। रात को 11 बजे के बाद अगर कोई व्यक्ति उस रास्ते से निकलना चाहता है तो चौकीदार को गेट खोलकर उसे निकालना होगा।

निगम हाउस में दी गई इस व्यवस्था के खिलाफ अब लोगों ने गेट लगाने के नाम पर सरकारी रास्तों पर ही कब्जे कर लिए थे। कुछ छोटी सड़कें तो ऐसी हैं, उनके गेट तभी खुलते हैं जब नगर निगम को सड़क आदि बनवानी होती है, बाद में गेट बंद कर दिए जाते हैं, खर्चा निगम करती है, उसका पर कब्जा कुछ लोगों ने कर लिया है।

परवाना नगर निवासी सुमित चावला, अमित चावला, दीपक कुमार, नवदीप सोनकर.डा.शाम सुंदर गर्ग, ईश्वर जिदल, मुकेश गुप्ता, राकेश आदि शहर के प्रबुद्ध लोगों के हस्ताक्षर से एक ज्ञापन 13 अक्टूबर को निगम कमिश्नर सुरिदर सिंह को दिया था। परवाना नगर निवासी सुमित चावला का कहना है कि निगम कमिश्नर सुरिदर सिंह ने उनकी बात को ध्यान से सुनने के बाद समस्या के समाधान की बात कही थी, लेकिन अभी तक मौके पर निरीक्षण के लिए ही कोई नहीं पहुंचा।

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