राज कुमार राजू.मोगा

जिले में डेंगू का प्रकोप थम नहीं रहा है। मंगलवार को एक ही दिन में पांच नए केस सामने आए हैं, तीन मरीजों की रिपोर्ट अभी आनी है। उधर, स्वास्थ्य विभाग की टीमें जिले भर में डेंगू मच्छर का लारवा नष्ट करने के लिए जी-जान से जुटी हुई है।

लापरवाही की हद यह है कि मथुरादास सिविल अस्पताल में पनप रहा डेंगू मच्छर के लारवे पर किसी का ध्यान नहीं है। पेयजल सप्लाई वाली लाइन कई जगह से अस्पताल परिसर में लीक हो रही है। साफ पानी कई-कई दिन तक जमा रहता है। जिले में अब तक 36 डेंगू के मरीज सामने आ चुके हैं। थाना मैहना के प्रभारी डेंगू से पीड़ित होने के 15 दिन बाद भी पूरी तरह ठीक नहीं हो सके हैं। निगम का एकमुलाजिम भी डेंगू पाजिटिव आ चुका है।

मच्छरदानी लगाकर किया जा रहा उपचार

सिविल अस्पताल के फिजिशियन

डाक्टर साहिल गुप्ता ने बताया कि डेंगू से पीड़ित मरीज को काट चुका मच्छर यदि किसी अन्य व्यक्ति को काटता है तो भी डेंगू होने का खतरा बढ़ जाता है। उसी को लेकर अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों के उपचार के समय मच्छरदानी का प्रयोग किया जा रहा है। अधिकतर लोग बुखार या शरीर में दर्द होने पर अपने स्तर पर खुद का उपचार शुरू कर देते हैं। जब तक अस्पताल पहुंचते हैं हालत गंभीर हो चुकी होती है। मरीज की ओर से खुद दवा लेना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि डेंगू पीड़ित मरीज के शरीर में किसी प्रकार का एंटीबायोटिक जाने पर डेंगू का प्रभाव और बढ़ जाता है। शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से कम हो रही है या नहीं, इसका भी ध्यान रखना बेहद जरूरी है। अक्टूबर में एकाएक बढ़े केस

डाक्टर मनीष अरोड़ा का कहना है कि सितंबर के अंत तक डेंगू के 10 केस मिले थे। अक्टूबर में डेंगू मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। डेंगू फैलने का कोई एक कारण नहीं है और इसे रोकना किसी चुनौती से कम नहीं है। सेहत विभाग की एंटी लारवा टीम ने शहर में जी तोड़ मेहनत कर अच्छे परिणाम दिए हैं। निगम की ओर से फागिग भी करवाई गई है। डा. मनीष अरोड़ा के अनुसार अगर एक सप्ताह तक बुखार रहता है तो मरीज को एनएस 1 का टेस्ट करवाना चाहिए। वहीं सात दिन से ज्यादा बुखार रहने वाले मरीज को एलाइजा टेस्ट करवाना चाहिए। सरकारी अस्पताल में ये टेस्ट पूरी तरह से मुफ्त किए जाते हैं। निजी अस्पतालों में एलाइजा टेस्ट नहीं किया

जाता। सरकारी अस्पताल में डेंगू के उपचार के पूरे प्रबंध हैं। डेंगू से ऐसे बचें

-घर या आफिस के आसपास पानी जमा न होने दें।

-अगर पानी जमा होने से रोकना मुमकिन नहीं है तो उसमें पेट्रोल या केरोसिन डालें।

-रूम कूलरों, फूलदानों का सारा पानी हफ्ते में एक बार और पक्षियों को

दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह से खाली करें, उन्हें सुखाएं और

फिर भरें। घर में टूटे-फूटे डिब्बे, टायर, बर्तन, बोतलें आदि न रखें। अगर

रखें तो उलटा करके रखें।

-डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए पानी की टंकी को अच्छी

तरह बंद करके रखें।

-खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाकर रखें ।

-मच्छरों को भगाने और मारने के लिए मच्छरनाशक क्रीम व स्प्रे आदि का इस्तेमाल करें। ये हैं लक्षण ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ना,सिर,मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना,आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और बढ़ जाता है,बहुत ज्यादा कमजोरी लगना, भूख न लगना और जी मिचलाना और मुंह का स्वाद खराब होना,गले में हल्का-सा दर्द होना,शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग

के रेशेज होना आदि डेंगू के लक्षण हैं।

Edited By: Jagran