यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 23, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मुख्यमंत्री चन्नी कल मोगा में, तैयारियों में जुटा प्रशासन
। जिला अग्रवाल समाज के आक्रोशित तेवर के बाद आखिरकार मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने 25 नवंबर को ही मोगा ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता.मोगा
जिला अग्रवाल समाज के आक्रोशित तेवर के बाद आखिरकार मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने 25 नवंबर को ही मोगा पहुंचकर महाराजा अग्रसेन जी की मूर्ति का अनावरण करने का फैसला किया है। वे दोपहर दो बजे पुरानी दाना मंडी में महाराजा अग्रसेन जी महाराज की मूर्ति स्थापना के साथ ही कोटकपूरा बाईपास पर भगवान विश्वकर्मा जी की मूर्ति का भी अनावरण करेंगे। गीता का उपदेश देते हुए भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति अभी तैयार नहीं होने के कारण इसका अनावरण बाद में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री का कार्यक्रम तय हो जाने के बाद जिला प्रशासन भी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गया है। सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से मंगलवार को पुलिस अधिकारियों ने आयोजन स्थल का निरीक्षण किया। दो दिन पहले मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में आ रहीं कानूनी अड़चनों के बाद उग्र तेवर अख्तियार करने वाले अग्रवाल समाज ने अब पुरानी दाना मंडी के महाराजा अग्रसेन जी की मूर्ति के लिए तय किए गए स्थान को आदर्श स्थल बनाने की घोषणा कर दी है, साथ ही समारोह को भव्य बनाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
जिला अग्रवाल सभा के अध्यक्ष मंजीत कंसल व चेयरमैन डा.सीमांत गर्ग ने बताया कि समारोह से संबंधित सभी तैयारियां मुकम्मल कर ली गई हैं। अग्रवाल समाज के 500 मेधावी विद्यार्थियों को महाराजा अग्रसेन जी की मूर्ति की स्थापना के समय सम्मानित किया जाएगा। सम्मानित होने वाले बच्चों में उन विद्यार्थियों को शामिल किया गया है, जिन्होंने शिक्षा, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों के अलावा सामाजिक गतिविधियों और पर्यावरण सुधार के लिए काम किया है। जानवी और परव भी होंगे सम्मानित
कोरोना काल में पर्यावरण के लिए अनोखी मिसाल कायम करने वाले भाई-बहन पहली कक्षा का विद्यार्थी परव और आठवीं कक्षा में पढ़ती उसकी बहन जानवी भी इस मौके पर विशेष रूप से मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के हाथों सम्मानित होंगे। दोनों भाई-बहन ने अपने घर में पांच बिन्दुओं पर काम करते हुए पांच सितारा बना दिया है। पूरे घर में डेढ़ हजार से ज्यादा औषधीय महत्व, ज्यादा आक्सीजन देने वाले पौधे व आर्गेनिक विधि से पैदा की गई सब्जियां उगाकर बाजार की सब्जियों पर निर्भरता 80 प्रतिशत से ज्यादा कम कर दी है। घर के गीले कचरे को खाद में बदलकर वे उसे कचरे में नहीं फेंकते। प्लास्टिक कैरी बैग का प्रयोग नहीं करते। बाहर से कोई मेहमान लेकर आता है, तो उसे एकत्र कर री- साइकिल के लिए भेज देते हैं। घर में डेढ हजार से ज्यादा पौधे लगाने के कारण न एसी का प्रयोग करना पड़ता है न कूलर का। इस प्रकार से वे ऊर्जा बचाने का भी काम कर रहे हैं। साथ ही घर के बेकार हो चुके सामान से कलाकृतियां बनाकर एक कमरे को 'रचना संसार' का रूप दिया है। कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे हर्ष गोयल ने बताया कि इस मौके पर विभिन्न स्कूल के बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश करेंगे।
