संस, सरदूलगढ़ : क्षेत्र के युवा नशा छोड़ने के लिए तैयार हैं। लेकिन दुख इस बात का है कि नशा छोड़ने के लिए उन्हें दवाई ही नहीं मिल रही। नशा छोड़ने के इच्छुक लोग रोजाना सरकारी अस्पताल के चक्कर काटने को मजबूर है। वह रोज इसी आस से अस्पताल में आते हैं कि शायद आज उनको नशा छोड़ने के लिए दवा मिल जाएगी। लेकिन अफसोस की बात उनको खाली हाथ ही लौटना पड़ता है। सरकारी तंत्र का इस तरह का लापरवाह रवैया युवाओं को नशे की दलदल में धकेलने को मजबूर कर रहा है। बता दें कि पंजाब सरकार ने तंदुरुस्त पंजाब मिशन सूबेभर में जोर-शोर से चलाया हुआ है। लेकिन ये मिशन कितना जमीनी स्तर पर कामयाब हो रहा है। इसका ताजा उदाहरण सरदूलगढ़ के सिविल अस्पताल में देखने को मिल रहा है। दरअसल क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में नशा छोड़ने की दवाई ही नहीं उपलब्ध है। अस्पताल कुप्रबंधन से खफा होकर तथा नशा छोड़ने की दवा न मिलने के रोष में पीड़ितों ने सिविल अस्पताल के आगे धरना देकर पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

पहले मिलती थी 2 गोलियां फिर एक और अब कुछ नहीं

मोनू कुमार, काला राम, मलकीत ¨सह, गुरनाम ¨सह, हरजीत ¨सह, बल¨जदर ¨सह, सुक्खा ¨सह, टहल ¨सह, जंटा ¨सह, कर्मजीत ¨सह के अलावा अन्य लोगों ने कहा कि वह लंबे समय से नशे का सेवन कर रहे थे। जब पंजाब सरकार की नशा छोड़ो मुहिम का पता चला तो हम सब नशा छोड़ने के लिए तैयार हो गए। इसके लिए रोजाना सिविल अस्पताल जाने लगे। वहां से प्रतिदिन दो गोलियां नशा छोड़ने के लिए मिलती थी। कुछ दिन बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने एक गोली देनी शुरू कर दी जिससे उनकी तबीयत खराब होने लगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग नशा छोड़ने वाली दवा को बाहर बेच रहे हैं।

आरोप बेबुनियाद, दी जा रही है दवा

जब इस बारे मे डॉक्टर कमल कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार की हिदायत के अनुसार नशा छोड़ने वाले लोगों को दवा दी जा रही है जो उन्हें अस्पताल में ही खानी है। उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया ।

Posted By: Jagran