संसू सरदूलगढ़: भारतीय किसान यूनियन एक्ता उगरांहा की ओर से अपनी मांगों को लेकर एसडीएम दफ्तर सरदूलगढ़ के सामने धरना लगा कर रोष प्रगट किया गया।

जत्थेबंदी नेता उतम सिंह रामानंदी ने कहा कि सरकार द्वारा गुलाबी सुंडी से खराब हुए नरमें की फसल का मुआवजा नहीं दिया और न ही किसान संघर्ष के दौरान मरनें वाले किसानों के परिवारों को सरकारी नौकरी दी, जिसके चलते उनके मन में सरकार के प्रति रोष है। उन्होंनें मांग करते हुए कहा कि खराब हुई फसल का मुआवजा दिया जाए। किसान संघर्ष के दौरान मरने वाले किसानों के परिवारों को सरकारी नौकरी के अलावा मुआवजा दिया जाए। उनके क्षेत्र की खराब सड़कों को नए सिरे से बनाया जाए। अगर उनकी मांग को पूरा न किया गया तो आने वाले समय में कड़ा संघर्ष किया जाएगा। इस अवसर पर किसान नेता हरपाल सिंह, जगजीत सिंह, जसविदर कौर, रानी कौर के अलावा अन्य मौजूद थे।

उधर, भारतीय किसान यूनियन एकता उग्रराह मौड़ मंडी की तरफ से कपास के मुआवजे की मांग को लेकर 26 जनवरी को एसडीएम दफ्तर मौड़ में दिए जाने वाले रोष धरने की तैयारी को लेकर सोमवार को नौ गांवों में बैठकें की गई।

इस मौके पर दर्शन सिंह माइसरखाना, गुरमेल सिंह रामगढ़ भूंड़द, राजविदर सिंह रामनगर, भोला सिंह मारी, कलकत्ता सिंह मानक खाना, जसवीर सिंह बुर्ज सेमा और भूपिदर सिंह भाई बख्तौर ने कहा कि इस बार कपास की फसल पर गुलाबी टिड्डियों का हमला हुआ। प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल बर्बाद हो गई, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बावजूद किसानों और मजदूरों के खातों में मुआवजे के पैसे नहीं आए हैं, जबकि फसल के नुकसान की भरपाई अगली फसल बोने से पहले करनी होगी। इससे पहले 17 जनवरी से 19 जनवरी तक एसडीएम मौड़ कार्यालय के सामने धरना आयोजित किया गया था, जिसमें एसडीएम मौड़ ने 21 जनवरी तक गांवों में किसानों की मुआवजा सूची बांटकर मुआवजा बांटने का वादा किया था। किसान नेताओं ने कहा कि चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले की गई मांग को चुनाव आयोग को अवरुद्ध करने के झूठे बहाने किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे की चोरी कर शर्मसार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज से गांवों में बैठक कर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और लंगर के लिए पानी की आपूर्ति की जाएगी। रात्रि विश्राम के लिए ट्रॉली या टेंट की भी व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों और मजदूरों के खातों में मुआवजे की राशि जमा नहीं हो जाती तब तक धरना जारी रहेगा।

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