जेएनएन, मानसा। हरियाणा सरकार ने 'मेरी फसल मेरा विवरण' स्कीम लागू कर मंडियों में फसल बेचने से पहले रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी कर दिया है। इसमें सिर्फ हरियाणा के किसानों का ही रजिस्ट्रेशन होगा। ऐसे में अब पंजाब व राजस्थान के किसान अपनी फसलें वहां जाकर नहीं बेच पाएंगे। इस पाबंदी से सीमावर्ती राज्य पंजाब व राजस्थान के किसानों में रोष है।

मानसा में पंजाब किसान यूनियन के सूबा सीनियर उपप्रधान राम सिंह भैणीबाघा ने कहा है कि हरियाणा सरकार के इस नादिरशाही फरमान से पंजाब और राजस्थान के किसानों को भारी नुकसान होगा। हरियाणा की ओर से लगाई पाबंदी के कारण किसानों के लिए विशेष कर गेहूं व धान की फसल बेचने में बहुत बड़ी समस्या आएगी। उन्होंने ने कहा कि पंजाब और हरियाणा के किसान धान की बासमती किस्म की खेती बड़े स्तर पर करते हैं और इसकी खरीद हरियाणा के व्यापारी ही अधिक किया करते हैं। ऐसे में पाबंदी से यहां के किसान हरियाणा में अपनी फसल लाभदायक रेटों पर नहीं बेच सकेंगे।

पंजाब किसान यूनियन ने किया विरोध, प्रदर्शन की चेतावनी

राम सिंह ने कहा कि पंजाब किसान यूनियन हरियाणा सरकार के इस फैसले का सख्त विरोध करती है। एक तरफ तो साल 1992 में  'गैट' समझौता कर यह पॉलिसी लागू की गई कि किसान अपनी फसल जिस भी सूबे में चाहें बेच सकते हैं, परन्तु पड़ोसी राज्य हरियाणा की सरकार अपना किसान विरोधी चेहरा दिखा ऐसी पाबंदियां लगा रही है। इससे किसानों में भारी रोष पाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार दखल देकर या हरियाणा सरकार खुद यह पॉलिसी नहीं बदलेगी तो पंजाब के किसान सड़कों पर उतर प्रदर्शन करेंगे।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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