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दसवें दिन हुआ दलजीत सिंह का अंतिम संस्कार, बहन अमरजीत कौर ने दिया कांधा; मानसा में सुरक्षा कड़ी

Published: Thu, 05 Nov 2026 04:41 PM (IST)Updated: Thu, 05 Nov 2026 04:47 PM (IST)

मानसा के भंम्मे कलां गांव में दलजीत सिंह का 10 दिन बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर कड़ी सुरक्षा के बीच ...और पढ़ें

मानसा में दसवें दिन हुआ दलजीत सिंह का अंतिम संस्कार। फोटो जागरण

मानसा में दसवें दिन हुआ दलजीत सिंह का अंतिम संस्कार। फोटो जागरण

HighLights

  1. दलजीत सिंह का 10 दिन बाद गांव में अंतिम संस्कार।

  2. हाईकोर्ट के निर्देश पर गांव में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था।

  3. परिवार को 50 लाख मुआवजा, पत्नी को सरकारी नौकरी।

जागरण संवाददाता, मानसा। जिले के गांव भंम्मे कलां के नौजवान दलजीत सिंह का शुक्रवार को पीजीआई चंडीगढ़ से पोस्टमार्टम के बाद उसके पैतृक गांव में 10वें दिन के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया है। चंडीगढ़ से एक एबुलेंस के जरिए दलजीत सिंह की लाश को लेकर उसकी बहन अमरजीत कौर लेकर गांव के शमशानघाट पहुंची।

हाईकोर्ट के कड़े निर्देश पर अंतिम संस्कार को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से एसपी के नेतृत्व में करीब 300 पुलिस कर्मचारियों को गांव के शमशानघाट के बाहर कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। हाईकोर्ट की ओर से दलजीत सिंह के अंतिम संस्कार के दौरान किसी भी राजनीतिक पार्टी के नेता के पहुंचने पर मनाही की गई थी।

दलजीत सिंह अपने पीछे माता,पिता,दो बच्चे एक बेटा और एक बेटी के अलावा माता पिता को छोड़ गया है। वीरवार को बचत भवन में पहुंचे विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवा की ओर से दलजीत सिंह के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा और पत्नी को सरकारी नौकरी देने का एलान किया गया।

हत्या कर लाश फेंकने का आरोप

इधर, पुलिस प्रशासन का तर्क था कि दलजीत सिंह की हत्या करने के बाद उसकी लाश को फेंका गया है। जिसमें पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार करने का दावा करते लाश का बठिंडा एम्स से पोस्टमार्टम कराया गया। दलजीत सिंह के अंतिम संस्कार को लेकर परिवार भी दो गुटों में बंट गया। पिता जरनैल सिंह परिवार ने धरने से बैठी उसकी पतनी, बहन और मां को गांव पहुंचकर अंतिम संस्कार के लिए कहा गया।

इसके बाद दलजीत सिंह की बहन अमरजीत कौर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते मामले की सीबीआई जांच और लाश परिवार को देने की मांग की गई। अदालत की ओर से पीजीआई से पोस्टमार्टम और चंडीगढ़ में ही अंतिम संस्कार करने का हुक्म सुनाया गया। जिसके बाद परिवार की अपील पर अदालत ने गांव में ही अंतिम संस्कार करने का हुक्म दिया गया।

क्या नशे के चलते हुई मौत?

बता दें कि 27 अक्टूबर को दलजीत सिंह अपनी बाइक पर बेटी को स्कूल बस पर चढ़ाने के बाद वापस घर नहीं लौटा और दोपहर समय परिवार को गांव रामानंदी के रास्ते पर उसका लाश पड़ी होने की जानकारी मिली। दलजीत सिंह की पतनी परमजीत कौर का आरोप था कि उसने नशा करना छोड़ दिया था और कुछ लोगों की ओर से उसे बुलाया गया और नशे की मात्रा अधिक लेने के चलते उसकी मौत हो गई। जिसके बाद परिवार ने लाश को सिरसा मानसा हाईवे रखते रोड़ जाम करते अरोपितों की गिरफ्तार की मांग रखी गई।

जिसकी सूचना मिलने के बाद परविंदर झोटा के पिता भीम सिंह और लक्खा सिधाना गांव पहुंचे और लाश को लेकर मानसा धरने की ओर निकल पड़े। शहर के रामदित्तेवाला चौक में पुलिस की ओर से की गई नाकाबंदी के दौरान दोनों तरफ से झड़प हुई और पुलिस पार्टी पर हमला करने के आरोप में थाना सिटी-1 पुलिस ने 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करते उसी शाम लक्खा सिधाना और मोहनजीत सिंह शेरों को गिरफ्तार करने के अलावा अन्य लोगों को हिरास्त में ले लिया।

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