जागरण संवाददाता, लुधियाना। कालेजों में अब स्टाफ की कमी आढ़े नहीं आएगी। अकसर देखा जाता है कि कालेजों में स्टाफ की कमी पिछले काफी सालों से चली आ रही थी। रिटायमेंट होने के बाद वह पोस्ट वैसे के वैसे ही खाली रहती थी। यूनिवर्सिटी ग्रांटस कमिशन (यूजीसी) ने अब इस पर गंभीरता दिखाई है और यूनिवर्सिटीज एवं संबंधित कालेजों से ब्यौरा मांगा है कि वह स्टाफ की डिटेल्स भेजे। साथ ही हर कालेज में कितनी पोस्टें खाली चल रही है, यह ब्यौरा 31 दिसंबर, 2021 तक यूजीसी को मुहैया कराया जाए।

यूजीसी ने जारी निर्देश में कहा कि इस समय उच्च शिक्षा में फैक्लटी की शार्टेज एक चिंता का विषय है, इसके लिए अभी से समाधान करने की जरूरत है। वहीं कालेजों में फैक्लटी की कमी प्राथमिकता के आधार पर पूरी करनी है। बता दें कि इससे पहले भी यूजीसी ने जून, 2019, जुलाई 2019, अगस्त और फिर सितंबर- अक्तूबर 2019 में भी यूनिवरि्सटीज, कालेजों में फैक्लटी की भर्ती को लेकर पत्र जारी किया था जिसके बाद भी यह प्रोसेस अधूरा ही चला आ रहा है। यूजीसी ने उक्त ब्यौरा यूनिवरि्सटी एकि्टविटिी मानिटरिंग पोर्टल पर अपलोड करने की बात कही है।

कालेज प्रबंधन बोले, यूजीसी की पहल होगी सराहनीय

कालेज प्रबंधन की माने तो वर्तमान में उच्च शिक्षा में फैकल्टी की शार्टेज एक बहुत बड़ी समस्या है। स्टाफ के सेवानिवृत होने के बाद वह पोस्टें कई-कई साल तक खाली चली आर रही है क्योंकि भर्ती प्रक्रिया बंद थी। खैर अब यूजीसी ने यह पहल की है जिसके तहत यूनिवर्सिटीज और कालेजों ने फैक्लटी का ब्यौरा मांगा है और जिसे यूजीसी के ही पोर्टल पर अपलोड करने की बात कही है, वह बहुत ही सराहनीय है। आर्य कालेज की प्रिंसिपल डा. सविता उप्पल ने कहा कि यूजीसी ने फैक्लटी के खाली पोस्टों का आंकड़ा मांगा है, वह अच्छा कदम है। यूजीसी के इस प्रयास से अगर कालेजों में फैकल्टी की पोस्टें भरी जाती है तो उच्च शिक्षा की क्वालिटी और भी बेहतर हो सकती है।

Edited By: Vinay Kumar