लुधियाना, जेएनएन। महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह के जन्मदिवस पर कारखाना मजदूर यूनियन द्वारा ग्यासपुरा के गुरपाल नगर में समागम आयोजित किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि शहीद भगत सिंह को याद करने का असल अर्थ उनके सपनों के लूट-खसूट से मुक्त समाज के निर्माण के लिए कोशिशें तेज करना है। नौजवान भारत सभा की टीम ने मजदूरों-मेहनतकशों के दुखों-दर्दों की पेशकारी करता नाटक ‘गढ्ढा’ और अनेकों क्रांतिकारी गीत पेश किए। समागम के दौरान कारखाना मजदूर यूनियन के नेताओं लखविंदर, आरजू खान और विमला ने संबोधित किया। मोल्डर एवं स्टील वर्कर्ज यूनियन के नेता हरजिंदर सिंह ने भी उपस्थिति को संबोधित किया।

वक्ताओं ने कहा कि शहीद भगत सिंह का जन्मदिन मनाना एक रस्म अदायगी नहीं है। आज देश के मजदूरों, मेहनतकशों, नौजवानों को जिन भयंकर हालातों से गुजरना पड़ रहा उनमें भगत सिंह को याद करना बेहद ज़रूरी है। हमें यह याद करना होगा कि भगत सिंह की लड़ाई महज विदेशी हकूमत के खिलाफ नहीं थी। बल्कि देशी शोषक वर्गों के खिलाफ भी थी।

भगत सिंह और उनके साथियों के दस्तावेज इस बात का सबूत हैं कि वे भारत में मजदूरों-मेहनतकशों का राज चाहते थे न कि पूंजीवाद। सन् 1947 के बाद देश की हकूमत पर पूंजीपतियों के हुए कब्जे का ही नतीजा है कि आज देश की 80 फीसदी आबादी गरीबी-बदहाली की असहनीय परिस्थितियों का सामना कर रही है। वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा मोदी हुकूमत जनआवाज को अनसुना करते हुए बेहद जनविरोधी नए श्रम, बिजली और श्रम कानून लागू करने की तैयारी कर रही है।

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