लुधियाना [मुनीश शर्मा]। राजनीति में कदम रखने वाले गैर राजनीतिज्ञों का संयुक्त समाज मोर्चा इस बार के विधानसभा चुनाव में एक नई चुनौती पैदा करेगा। किसान, मजदूर, व्यापारी, गायक, प्रोफेशनल्स के 35 के करीब संगठन पंजाब की राजनीति में उबाल ला रहे हैं। इसमें अधिकतर चेहरे भले ही नए मैदान में उतारे जा रहे हैं, लेकिन इनमें हर वर्ग को फोकस करते हुए पंजाब की सत्ता में एक नया बदलाव का प्रयास है। इसमें किसान आंदोलन की तर्ज पर ग्राउंड वर्क करने वाले प्रत्याशियों को मैदान में उतारा जा रहा है और इनके समर्थन के लिए किसान आंदोलन की तर्ज पर ही टीमों को तैयार किया गया है। ताकि हर प्रत्याशी को पहली बार चुनाव मैदान में उतरने पर राजनीतिक सीख भी दी जा सके। अभी तक जारी की गई। 47 लोगों की सूची में अधिकतर चेहरे नए हैं और इन्हें चुनाव लड़ने का अनुभव नहीं है। बावजूद इसके इन्हें विजेता बनाने के लिए प्रचार से लेकर चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी ट्रेनिंग दी जा रही है।

संयुक्त समाज मोर्चा में 35 के करीब संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। इस सूची में इस बात का ध्यान रखा गया है कि प्रत्याशी केवल एक ही समुदाय से संबंधित न रह जाए। इसलिए इसमें किसानों के साथ-साथ उद्योगपति, मजदूर, प्रोफेशनल और गायकों का भी समर्थन किया गया है। पंजाब की राजनीति में इस पार्टी के जरिए वोट प्रतिशत को भी एक बड़ा झटका दिया जा सकता है। क्योंकि इसमें शामिल किए गए प्रत्याशी अपनी इलाके में किसान आंदोलन के दौरान सक्रिय रहें है और एक अहम वर्ग में अपनी पैठ रखते हैं।

बात संगठनों की करें, तो 35 से अधिक संगठन संयुक्त समाज मोर्चा में शामिल हैं। इनमें भारतीय किसान युनियन राजेवाल, भारतीय किसान युनियन पंजाब, किसान बचाओ मोर्चा, इंटरनेशनल पंथक दल, गायकों और अभिनेताओं का संगठन जूझदा पंजाब, लोक अधिकार लहर, भारतीय आर्थिक पार्टी, दोआबा किसान संघर्ष कमेटी, जमहूरी किसान सभा, भारतीय किसान युनियन दोआबा, कुलहिंद किसान सभा सहित कई संगठन शामिल है। संयुक्त समाज मोर्चा का सिद्वांत पंजाब की राजनीति के वादे कर पूरा न करने के दौर को बदलना है। इसमें अधिकतर प्रत्याशी मध्यम वर्गीय परिवारों से लिए गए हैं। अब देखने योग्य होगा कि कितने वोट ले पाते हैं और पंजाब की राजनीतिक बदलाव में इनकी क्या भूमिका रहती है।

Edited By: Vinay Kumar