यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 03, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Punjab: नौ साल तक Bike के नंबर पर चलती रही डीएवी कालेज के प्राेफेसर की Car, जानें कैसे खुला राज
अबोहर के प्रोफेसर ने वर्ष 2011 में कार खरीदी थी। उस समय अबोहर फिरोजपुर जिले का हिस्सा था। यहीं पर ...और पढ़ें

फिरोजपुर, जेएनएन। इसे परिवहन विभाग में चल रही गड़बड़ी कहें या लापरवाही पिछले नौ साल से कार बाइक के नंबर पर सड़कों पर दौड़ती रही। वर्ष 2020 में हुए एक्सीडेंट के बाद इंश्योरेंस कंपनी से मुआवजा मांगा तो राज खुला। मुआवजे के लिए इंश्योरेंस कंपनी ने जांच कराई तो आरसी की वेरीफिकेशन करने के बाद आरटीए आफिस ने कहा कि नंबर बाइक पर लगा है।
अबोहर के डीएवी कालेज के कामर्स के प्रोफेसर गौरव विज ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2011 में कार खरीदी थी, तब अबोहर फिरोजपुर जिले का हिस्सा था। कार फिरोजपुर के डीटीओ आफिस से रजिस्टर्ड करवाई गई थी। 23 नवंबर 2020 को बाइक की टक्कर से उनकी कार का शीशा टूट गया था। इसके बाद इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम किया तो कंपनी ने कार रजिस्ट्रेशन की जांच कराई तो पता चला कार पर बाइक का नंबर लगा है। यह नंबर नरिंदर चौधरी नामक व्यक्ति को आवंटित किया गया है। इतनी बड़ी गलती कैसे हुई यह जांच जरूरी है।
दस साल पहले मैनुअल बनती थी आरसी
रिजनल ट्रांसपोर्ट अथारिटी अधिकारी प्रदीप ढिल्लो ने कहा कि दस साल पहले मैनुअल आरसी बनती थी। अब डाटा आनलाइन करते वक्त किसी आपरेटर से गलती हो सकती है। शिकायतकर्ता उनसे आकर मिले तो वह पूरी पड़ताल कर आरसी ठीक करवा देंगे। इसमें कोई घपले की बात नहीं है। उनके आफिस का काम आनलाइन और पारदर्शिता से चल रहा है।
बिना डाक्यूमेंट के कोई भी इंश्योरेंस कंपनी कर सकती है बीमा
एडवोकेट नीतिश दुगल बताते हैं कि आइआरडीए के नियमों के मुताबिक बिना डाक्यूमेंट के भी कोई भी इंश्योरेंस कंपनी बीमा कर सकती है और क्लेम करते वक्त कंपनी को जांच का अधिकार है। पहले रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मैनुअल होने के कारण घपलेबाजी की आशंका रहती थी, लेकिन आजकल आनलाइन रजिस्ट्रेशन होने के कारण इंश्योरेंस करते वक्त ही व्हीकल का पूरा रिकार्ड इंश्योरेंस कंपनी के पास आ जाता है। इसलिए कई बार पुरानी रजिस्ट्रेशन में इस तरह की दिक्कत आ जाती है। उपभोक्ता इस बारे में इंश्योरेंस कंपनी की बजाय सीधे आरटीए कार्यालय से संपर्क करे।
