यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 12, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Strike In Ludhiana: गर्भवती महिलाओं की परेशानी बढ़ी, 100 किमी दूर पीजीआइ व राजिंद्रा अस्पताल किया जा रहा रेफर
Strike In Ludhiana स्टाफ नर्स नहीं होने के कारण पिछले चार दिनों से यहां सिजेरियन केस नहीं हो पा रहे। ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, लुधियाना। Strike In Ludhiana: सरकारी अस्पतालों में चल रही नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल का सबसे ज्यादा प्रभाव सिविल अस्पताल आने वाले गंभीर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। स्टाफ नर्स न होने के कारण पिछले चार दिनों से यहां सिजेरियन केस नहीं हो पा रहे। ऐसे मरीजों को लुधियाना से लगभग 100 किलोमीटर दूर पटियाला के रजिंद्रा अस्पताल या फिर चंडीगढ़ के पीजीआई रेफर किया जा रहा है।
सिजेरियन केसों को इस तरह इतनी दूर ले जाने में मरीज के तीमारदारों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कुछ मरीजों को यह कहकर लौटा दिया गया कि अभी समय नहीं हुआ। मरीजों का कहना था कि उनके टेस्ट भी लिए गए और उन्हें कहा गया कि अभी डिलीवरी के लिए समय है, अगले सप्ताह तक दोबारा आ सकते हैं। इतना ही नहीं, पिछले चार दिनोें से सिजेरियन कक्ष में ताला लटका पड़ा है और मरीजों को मायूस होना पड़ रहा है।
डेंगू और डायलिसिस विभाग भी प्रभावित
सिविल अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के हड़ताल पर जाने के चलते गायनी वार्ड के अलावा डेंगू और डायलिसिस वार्ड में मरीजों को परेशानी झेलने पड़ रही है। डेंगू वार्ड में भर्ती पांच मरीजों को कांट्रेक्ट बेसिस पर रखे स्टाफ ने देखा जबकि डायलिसिस सेंटर पूरी तरह से बंद रहा। सिविल अस्पताल के जच्चा बच्चा विभाग के एसएमओ रणधीर सिंह चाहल ने कहा कि नर्सों की हड़ताल के कारण परेशानी तो हो रही है पर इसे मैनेज किया जा रहा है।ज्यादा से ज्यादा मरीजों को चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाई जा रही हैं।
बेनतीजा रही बैठक
उधर, हड़ताल पर चल रही स्टाफ नर्सों ने सिविल अस्पताल के जच्चा-बच्चा विभाग के बाहर धरना लगा नारेबाजी की। ज्वाइंट एक्शन नर्सिंग एसोसिएशन की जिला प्रधान आशा व अन्य नर्सिस की मीटिंग चंडीगढ़ में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ हुई लेकिन बैठक बेनतीजा रही। प्रधान आशा ने कहा कि अधिकारियों ने हड़ताल वापस लेने की बात कही जबकि नर्सेज लिखित में मांगें पूरी किए जाने की मांग कर रही थी, जिसे माना नहीं गया और अब हड़ताल आगे भी जारी रहेगी।
नर्सिंग स्टाफ की मांगें
छठे पे कमिशन में उनकी ग्रेड पे 4600 से कम कर 3200 कर दी गई है जोकि बढ़ाई जानी चाहिए। दूसरी मांग नर्सिस के कुछ भत्ते भी बंद कर दिए गए हैं और कुछ कम कर दिए गए है, उन्हें जारी रखा जाए। तीसरा सितंबर 2020 के बाद जो भी नर्सिंग रखी गई हैं, उन्हें सेंटर अनुसार ग्रेड पे दिया जा रहा है जिसे पंजाब के अंदर लाया जाए। वहीं अन्य राज्यों में नर्सिंग अफसर का पद जारी किया गया है, अन्य राज्यों की तरह यहां भी नर्सिंग स्टाफ का पद लागू किया जाए।
