लुधियाना, [दिलबाग दानिश]। गिल रोड स्थित इंडिया इंफोलाइन फाइनांस कंपनी की शाखा में बड़े कारोबारी अपना सोना रखकर लोन लेते थे। गिल रोड पर ज्यादातर लोहा व्यापारी ही हैं। यहां पर करीबन 200 लोगों का सोना रखकर छह करोड़ रुपये का लोन दिया गया था। जैसे ही लूट की वारदात संबंधी लोगों को पता चला तो वह वहां पहुंच रहे थे। पुलिस ने आरोपितों का सुराग बताने वाले को पांच लाख का इनाम देने की भी घोषणा की है।

पुलिस ने सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगे कैमरों को खंगाला तो पता चला कि 12 मिनट में 30 किलो सोने के जेवरात और नकदी लूटकर भागने वाले आरोपित दक्षिणी बाईपास से होते हुए पहले दोराहा पहुंचे और उसके दिल्ली रोड से होते हुए अंबाला की तरफ भागे गए। पुलिस की टीमें सीसीटीवी कैमरों की सहायता से उनकी कार का क्राइम ट्रैक बनाकर पीछा कर रही हैं।

पुलिस के हाथ लगा रूट

आरोपित गिल नहर से होते हुए फाइनांस कंपनी के कार्यालय तक पहुंचे थे, जिसका पूरा रूट पुलिस के हाथ लग गया है। इसी की बिनाह पर पुलिस की करीबन पचास सदस्यीय टीम ने लोहारा पुल और आस-पास के लोगों से जानकारियां जुटाई हैं। यही नहीं पुलिस ने ग्यासपुरा, ढंडारी, सलेम टाबरी और कुछ अन्य एरिया में रेड कर पुराने दस नंबरियों और बदमाशों को हिरासत में लिया है।

पंजाबी में बात कर रहे थे लुटेरे

कंपनी की महिला कर्मचारी ने बताया कि दस बजे के बाद शाखा में पहुंची थी। तब मेन गेट खुला हुआ था। मैनेजर के केबिन में पहुंची तो पिस्टल लिए एक लुटेरे ने मुझे पकड़ा और बंधक बनाए दूसरे मुलाजिमों के पास सिर नीचे कर बैठा दिया। मैनेजर के केबिन समेत तीन अन्य जगह पर सिक्योरिटी अलार्म के बटन हैं। उसे भी दबाने नहीं दिया गया। मुलाजिमों के हाथ रस्सियों से बांधे थे। एक ने सिर पर मंकी कैप पहनी थी। बाकी ने हुड पहन रखे थे और मुंह पर कपड़ा बांधा था। आरोपित आपस में पंजाबी में बात कर रहे थे। उन्होंने मैनेजर से ही डिजिटल लॉक खुलवाया और लोहे की सेफ से नकदी और गहने लेकर फरार हो गए। वह काफी समय तक तो सहमे रहे। मैनेजर ने पड़ोसी दुकानदार और मालिक को सूचित कर गेट खुलवाया और सीधे सामने मौजूद सीआइए-3 के कार्यालय में गए। वहां मौजूद मुंशी को इस संबंधी जानकारी दी, जिसने इस संबंधी उच्च अधिकारियों को बताया और वह मौके पर पहुंचे।

कुछ ही दूर पर लगा था नाका, शाखा को बाहर से बंद कर आराम से निकले 

गिल रोड स्थित इंडिया इंफोलाइन गोल्ड लोन लिमिटेड की शाखा से लूटपाट करने के बाद तीन आरोपित बाहर निकले और बाद में एक ने बाहर आकर ताला भी लगा दिया। यही नहीं जिस समय लूट की वारदात को अंजाम दिया जा रहा था। तब आस-पास की दुकानें भी खुली थीं और बाहर लोगों की आवाजाही थी। फिर भी लुटेरे भागने में कामयाब रहे। वारदात से कुछ कदम की दूरी पर ही पाहवा अस्पताल चौक कट है, जहां ट्रैफिक पुलिस के नाके के साथ-साथ पीसीआर वाहन भी खड़ा था।

कर्मचारियों पर खड़े हुए 3 बड़े सवाल

  • गोल्ड लोन की शाखा में कोई भी बंदूकधारी गार्ड क्यों नहीं था?
  • चार सिक्योरिटी साइरन लगे होने के बावजूद बजाया क्यों नहीं गया?
  • लुटेरे इतनी आसानी से आखिर बाहर कैसे चले गए?

मिलरगंज व घुमारमंडी में भी ऐसे ही हुई थी लूट

आठ नवंबर 2019 को मिलरगंज में और पिछले माह घुमार मंडी में सुनार की दुकान पर हुई लूट की वारदातों में लुटेरों ने एक ही तरीके को अपनाया। पिछली दोनों वारदात में भी पांच ही लुटेरे थे। पहली वारदात में दो मोटरसाइकिल, दूसरी में फॉच्र्यूनर गाड़ी और तीसरी वारदात में हांडा सियाज गाड़ी का इस्तेमाल किया गया। आशंका जाहिर की जा रही है कि तीनों वारदात गिरोह के लुटेरों ने ही की होगी।

ग्राहक के आने के बाद खोला गया था सेफ का सिक्योरिटी सिस्टम

फाइनांस कंपनी के कार्यालय में सुबह एक ग्राहक आया था, जो सोना देकर पैसे लिया और चला गया। बता देंं कि बैंक में लगा सेफ का सिक्योरिटी सिस्टम मुख्य ब्रांच से ओटीपी आने के बाद ही खुलता है और इसके बाद उसी चार डिजिट के नंबर से पूरा दिन इसे खोला जा सकता है। सुबह ग्राहक के आने के बाद इसे पहली बार खोला गया था। 

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Posted By: Sat Paul

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