लुधियाना, [राजन कैंथ]। Call Center Fraud: यूके  में बैठकर फेक काॅल सेंटरों के लिए कोआर्डिनेटर का काम कर रहा मास्टर माइंड एनआरआइ आर्यन उर्फ आशीष वहां अलग-अलग बैंकों में 60 अकाउंट चला रहा था। इनमें गिरोह द्वारा चलाए जा रहे फर्जीवाड़े के माध्यम से लोगों को डरा धमका कर रकम जमा करवाई जाती थी। लुधियाना पुलिस अब उन सब अकाउंट्स को फ्रीज कराने के लिए प्रयासरत है।

डीजीपी पंजाब से हरी झंडी मिलने के बाद पुलिस अब मिनिस्ट्री आफ एक्सटर्नल अफेयर के जरिए उन बैंकों से संपर्क साध रही है, जिनमें आर्यन के अकाउंट चल रहे हैं। मिनिस्ट्री आफ एक्सटर्नल अफेयर के जरिए पुलिस उन विदेशी नागरिकों से संपर्क साधने में प्रयासरत है, जो इस गिरोह के हाथों ठगी का शिकार हुए हैं। बताया जा रहा है कि यूके सरकार की ओर से उनके नागरिकों के साथ हुए फ्राड की भरपाई कर दी जाती है। पुलिस को लग रहा है कि शायद ही कोई यूके नागरिक सामने आए। मगर केस को मजबूत बनाने तथा अदालत में गवाह खड़े करने के लिए पुलिस प्रयास जरूर करेगी।

अब तक हो चुकी है 39 लोगों की गिरफ्तारी

मास्टरमाइंड एनआरआइ आर्यन की गिरफ्तारी के लिए जहां पुलिस लुक आउट सर्कुलर जारी करवा रही है, वहीं उसकी गिरफ्तारी के लिए संबंधित एंबेसी से भी संपर्क साधा जा रहा है। मामले में अब तक लुधियाना, खरड़, दिल्ली तथा गुजरात से कुल 39 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। बाद में नामजद किए गए आशीर्ष उर्फ आर्यन समेत गुजरात के अहमदाबाद निवासी समर्थ और राहुल डोगरा को पकड़ा जाना अभी शेष है। समर्थ और राहुल सूरत से पकड़े जा चुके नमन सुखादिया के पार्टनर है। उनकी गिरफ्तारी के लिए रेड की जा रही है।

पुलिस आर्यन के साथियों का भी लगाएगी पता

तीनों के पकड़े जाने के बाद पुलिस इस बात का पता लगाएगी कि आर्यन यूके में किसकी मदद से बैंक अकाउंट खुलवाता था। उनके लिए लगाए जाने वाले दस्तावेज उसे कौन उपलब्ध कराता था। लोगों से ठगी गई रकम को हवाला के जरिये भेजने वाला उसका साथी कौन है। एसीपी साइबर सेल वैभव सहगल ने कहा कि पकड़े गए गिरोह के सदस्य यह तो बता ही चुके हैं कि देश के कई राज्यों में इस तरह के फेक काल सेंटर का फर्जीवाड़ा चल रहा है।

मगर यह पता लगाया जाना अभी बाकी है कि वह काल सेंटर कहां कहां चल रहे हैं। जब आशीष उर्फ आर्यन ही पकड़ा गया तो देश भर के सभी काल सेंटरों के बारे में पता चल जाएगा। लुधियाना में काल सेंटर के लिए हवाला की रकम लाने वाला गुजराती सचिन पटेल और गिरोह को साफ्टवेयर मुहैया कराने वाला दिल्ली निवासी वैभव गुप्ता को पहले ही पकड़ा जा चुका है। उनसे हुई पूछताछ में भी पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली हैं।