लुधियाना, [राजेश भट्ट]। भारतीय संस्कृति में अतिथि के सत्कार की परंपरा रही है। यहां घर में आने वाले वाले मेहमान को भगवान का दर्जा दिया गया है। लेकिन कोरोना इफेक्ट ने अतिथि देवो भव: की संस्कृति को 21 दिन के लिए नमस्ते कर दिया। घरों के गेट पर जहां पहले वेलकम या अतिथि देवो भव: के स्लोगन लिखे जाते थे। वहीं आजकल गेट पर घरों में नो एंट्री के पोस्टर लगा दिए हैं। अगले 21 दिन तक सभी लोगों को अपने घरों के बाहर इस तरह के पोस्टर लगाने होंगे ताकि कोई भी आपके घर के अंदर न आए।

लोग पहले सोशल मीडिया पर इस तरह के पोस्ट डाल रहे थे कि जब तक कोरोना वायरस का खतरा नहीं टल जाता तब तक किसी के घर न जाएं। मोदी की तरफ से पूरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन घोषित करने के साथ ही लोग भी एक्टिव हो गए हैं।

पद्म भूषण से सम्मानित व सेंट्रल यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. सरदारा सिंह जौहल ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा है कि 21 दिन के लिए उन्होंने अपने गेट पर अंदर से ताला लगा दिया है। उन्होंने साफ कर दिया कि यह ताला 21 दिन बाद खुलेगा, जिसको कोई बात पूछनी है वह गेट के बाहर से ही बात करे। लेकिन वह ताला नहीं खोलेंगे। समाज को बचाने के लिए ऐसा करना जरूरी है। उन्होंने आखिर में यह भी लिखा है कि ‘जो कुछ कर सकते थे कर लिया। 

लोग बरत रहे काफी सतर्कता

कोरोना वायरस से इंसानियत को बचाने के लिए जहां केंद्र और राज्य सरकार तत्पर है, वहीं विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठन भी अपना योगदान दे रहे हैं। लुधियाना की ऐतिहासिक जामा मस्जिद से कोरोना वायरस को लेकर नमाजियों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। जामा मस्जिद में अजान के बाद घरों में ही नमाज अदा की जा रही है। नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने बताया कि पिछले तीन दिनों से कोरोना वायरस को लेकर लगाए गए कफ्यरू में जरूरतमंद परिवारों में मास्क और राशन वितरित किया जा रहा है। गांव की अलग-अलग मस्जिदों में बाहर से आए लोगों को घर तक पहुंचाने के लिए भी विशेष अभियान चलाया गया है।

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Posted By: Satpaul

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