लुधियाना, [भूपिंदर भाटिया]। Punjab Politics: कांग्रेस की पंजाबी राजनीतिक शादी अपने आप में अनोखी रही। कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद ही शाम को नए दूल्हे के लिए घोड़ी तैयार हो गई थी, लेकिन बार-बार दूल्हा बदलता रहा। एक समय ऐसा लगा कि बारात निकल नहीं पाएगी, लेकिन देर शाम आखिरकार चरणजीत सिंह चन्नी दूल्हे के रूप में घोड़ी पर सवार हुए और राजभवन पहुंचे। इस घोड़ी के लिए सबसे पहले दूल्हे के रूप में सुनील जाखड़ का नाम आया, उसके बाद प्रताप सिंह बाजवा, मनीष तिवारी, नवजोत सिंह सिद्धू के नाम भी सामने आए। दोपहर बाद सूचना आई कि दूल्हे के रूप में सुखजिंदर रंधावा का नाम तय हो गया। घोड़ी भी तैयार और रंधावा भी तैयार हो गए। हालांकि रंधावा भी नहीं चढ़ पाए। बाद में चरणजीत चन्नी का नाम दूल्हे के रूप में सामने आया। इसी बीच एक कांग्रेसी ने तो यहां तक कह दिया, 'आखिर किन्नी वार लाड़ा बदलना है'

फिर मालवे में लगी सीएम की कुर्सी

भले ही कांग्रेस ने किन्हीं परिस्थितियों में चरणजीत ङ्क्षसह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि पंजाब को एक बार फिर 'सरदार' ही चलाएगा। पहली बार गैर सिख मुख्यमंत्री बनाने की कवायद भी अधूरी रह गई। इतना ही नहीं, चन्नी के नाम पर मुहर लगने के साथ ये भी साफ हो गया कि फिर सीएम मालवा क्षेत्र से ही होगा। पिछले 50 सालों से पंजाब के सीएम की कुर्सी मालवा से बाहर नहीं निकल पाई। सीएम चन्नी की घोषणा से पहले सुखजिंदर रंधावा का नाम लगभग तय हो गया था। रंधावा माझा के हैं। ऐसे में एक नई चर्चा शुरू हो गई थी कि पंजाब के सीएम की कुर्सी इस बार मालवे से बाहर जरूर निकलेगी, लेकिन चन्नी का नाम सामने आने के बाद इस पर भी विराम लग गया। हालांकि चन्नी ने पंजाब का पहला अनुसूचित वर्ग का सीएम बनने का गौरव हासिल कर लिया।

ट्वीटर की चिड़िया ने बताया सीएम का नाम

कांग्रेस की हमेशा से ही परंपरा रही है कि उनका हाईकमान ही सर्वोच्च होता है। हाईकमान का फैसला सर्वमान्य होता है। हाईकमान खुद या अपने प्रतिनिधि के मार्फत नए सीएम की घोषणा करता रहा है। यही कारण है कि कैप्टन अमरिंदर द्वारा इस्तीफा देने के बाद पार्टी के नेतृत्व को लेकर घमासान मच गया तो कांग्रेसी विधायकों ने नए कैप्टन के चयन के लिए हाईकमान को अधिकार सौंप दिए। ऐसा माना जा रहा था कि रविवार की सुबह 11 बजे दिल्ली से नाम को घोषणा की जाएगी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। कभी सुनील जाखड़ तो कभी रंधावा के नाम सामने आते रहे। इधर प्रदेश प्रभारी हरीश रावत भी होटल के बंद कमरे में रहे। उसके बाद कांग्रेस विधायकों को संबोधित करने के बजाय उन्होंने टवीटर पर चन्नी को सीएम बनाने की घोषणा कर दी। यह पहला अवसर था जब ट्वीटर की चिड़िया ने सीएम का नाम घोषित किया।

कांग्रेस ने एक तीर से कई निशाने साधे

पंजाब की राजनीति में आए तूफान पर भले ही कांग्रेस ने पंजाब का सरदार चुनने में बहुत देर लगाई, लेकिन पार्टी ने एक ही तीर से कई निशाने साधे हैं। सुनील जाखड़ के नाम पर जब सर्वसम्मति बन रही थी तो गैर सिख और सिख का मामला सामने आ गया। उसके बाद कुछ सिख नाम सामने आए, लेकिन उस पर राय बनती नहीं दिखी। प्रदेश प्रधान नवजोत सिद्धू भी इन नामों पर संतुष्ट नजर नहीं हुए। इसके बाद कांग्रेस ने एक ऐसा तीर चलाया, जो सिख भी था, सिद्धू का करीबी भी था, युवा भी था और सबसे बड़ी बात कि वह अनुसूचित वर्ग का है। इस तीर का उपयोग कांग्रेस उत्तर प्रदेश में आने वाले विधानसभा चुनाव में भी करने में जुटी है। यूपी चुनाव में अनुसूचित वर्ग के वोटों पर सेंध लगाने के लिए कांग्रेस प्रचार करेगी कि उसने पंजाब में उसी वर्ग के नेता को मुख्यमंत्री बनाया।

Edited By: Vipin Kumar