शहर की चरमराई ट्रैफिक व्यवस्था से व्यथित बीके गुप्ता का कहना है कि हमें चंडीगढ़ से सीख लेनी चाहिए। ऐसा क्यों है कि हम सभी नियमों का पालन चंडीगढ़ पहुंचकर ही करते है। वहां जाने से पहले प्रदूषण सर्टिफिकेट, इंश्योरेंस, आरसी, डीएल चेक करते है। सीट बेल्ट बांध लेते हैं। स्पीड लिमिट का ख्याल रखते हुए रेड लाइट जंप करने से गुरेज करते हैं। क्या ऐसा लुधियाना में नहीं हो सकता। हम सब में इसकी कमी तो है ही, वहीं ट्रैफिक पुलिस भी कम दोषी नहीं है। इसमें सुधार करना होगा, जिससे हादसे तो कम होंगे ही, वहीं लड़ाई झगड़े भी कम हो जाएंगे।

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प्रदूषण बड़ी समस्या, समाधान जरुरी 

प्रदूषण को लुधियाना की विकराल समस्या बताते हुए बीके गुप्ता कहते हैं कि बुड्डा दरिया, फैक्ट्रियों से निकलता जहरीला धुंआं और अवैध ऑटो प्रदूषण के लिए दोषी है। संबंधित विभागों को इन पर सख्ती करनी होगी। अफसरों को इच्छा शक्ति दिखानी होगी और राजनीतिज्ञों को हस्तक्षेप कम करना होगा, तभी कुछ हो पाएगा। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई रोककर अधिक पेड़ लगाने होंगे, नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब प्रत्येक व्यक्ति ऑक्सीजन ढूंढ़ता मिलेगा।

शहर के बाहरी हिस्सों की सड़कें खस्ताहाल
बीके गुप्ता का मानना है कि शहर की सड़कें तो ठीक हालत में हैं पर बाहरी हिस्से कंडम हो चुके हैं। खास तौर पर फोकल प्वाइंट की सड़कें, जहां से अधिकतम रेवेन्यू आता है, वहां की सड़कें तो इतनी बुरी हालत में हैं। स्थिति ऐसी हो चुकी है कि पता ही नहीं चलता कि कभी यहां सड़क थी भी कि नहीं।

पेयजल सप्लाई दुरूस्त, लेकिन गिरता भूजल चिंता का विषय
वे शहर में वाटर सप्लाई की स्थिति को अच्छा मानते हैं। कहते हैं कि शहर में पीने के पानी की दिक्कत नहीं है। इसके साथ ही भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, यह चिंता का विषय है। उनका कहना है कि शहर में रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम पर फोकस करना समय की जरुरत है, वहीं व्यर्थ बहने वाले पानी और पानी के अनावश्यक इस्तेमाल को रोकना होगा। इसके लिए बेहतर योजनाएं बनाए जाने की जरूरत है।

नगर निगम के रिटायर्ड एडिशनल कमिश्नर बीके गुप्ता को श्रेय है कि उनके कार्यकाल में एक साल में हाउस टैक्स रिकवरी में 63 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जो कि एक रिकॉर्ड है। जनगणना कार्य में बेहतरीन भूमिका निभाने वाले बीके गुप्ता को राष्ट्रपति अवॉर्ड से नवाजा गया था। 

-बीके गुप्‍ता
(नगर निगम के रिटायर्ड एडिशनल कमिश्नर )

By Krishan Kumar