राजेश भट्ट, लुधियाना 

लुधियाना में जैसे-जैसे इंडस्ट्री का विकास हुआ, वैसे वैसे नगर महानगर में तब्दील होता गया। आबादी बढ़ी तो शिक्षण संस्थानों ने भी लुधियाना पर अपना फोकस करना शुरू कर दिया। नेशनल से लेकर इंटरनेशनल चेन के स्कूल लुधियाना आए और शहरवासियों को शिक्षा हासिल करने के लिए नए विकल्प उपलब्ध करवाए।

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नेशनल और इंटरनेशनल चेन की एंट्री के साथ शहर के पुराने स्कूलों ने भी खुद को अपग्रेड किया और नेशनल व इंटरनेशनल चेन स्कू्ल को बराबर की टक्कर दी। नतीजा यह रहा कि पिछले कई सालों से आईसीएसई, सीबीएसई और पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के नतीजों में लुधियाना के विद्यार्थियों का दबदबा बना हुआ है।

इंजीनियरिंग हो या मेडिकल, यूपीएसई और या फिर पीसीएस हर परीक्षा में लुधियाना के विद्यार्थी टॉप करते रहे हैं। स्कूल एजुकेशन के साथ साथ हायर एजुकेशन में भी काफी विकास हुआ है, लेकिन अभी भी शहर को कुछ हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की दरकार है।

शहर में पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूल हैं। पिछले एक दो दशकों में शहर में नेशनल और इंटरनेशनल चेन के स्कूल आए तो शहर के पुराने स्कूलों ने भी खुद को अपग्रेड करना शुरू किया। अब हालात यह हैं कि कई स्थानीय स्कूल ब्रांड बन चुके हैं और शहर में पांच पांच से ज्यादा संस्थाएं खोल चुके हैं।

 

इसी तरह हायर एजुकेशन में भी शहर ने खूब तरक्कीं की, लेकिन अब भी दाखिले के लिए सबसे ज्यादा बोझ दो सरकारी कॉलेजों पर ही है। शहर में कोई प्रोफेशनल गवर्नमेंट कॉलेज नहीं है और न ही कोई सरकारी मेडिकल कॉलेज है, जिसकी वजह से शहर के युवाओं को या तो निजी स्कूलों में मोटी फीस भरने के लिए मजबूर होना पड़ता है या फिर वह शहर छोड़कर बाहर चले जाते हैं।

लड़कों के लिए नहीं पर्याप्त कॉलेज
लुधियाना शहर में लड़कियों के लिए उच्चर शिक्षण संस्थान काफी हैं। शहर में ज्यादातर कॉलेज सिर्फ लड़कियों के लिए हैं और बाकी के कॉलेज को-एड हैं। ऐसे लड़कों के लिए शहर में यूजी और पीजी कोर्सेज के लिए सीमित सीटें बच जाती हैं, जिसकी वजह से लड़कों को एडमिशन नहीं मिल पाता है। यही नहीं यूनिवर्सिटी में लड़कों के लिए प्राइवेट परीक्षा का प्रावधान नहीं है। पूर्वी हलके में विधायक संजय तलवार ने एक नया गवर्नमेंट कॉलेज तो खुलवाया लेकिन वह भी गर्ल्स कॉलेज खोला गया।

शहर में दो बड़ी यूनिवर्सिटी
शहर में पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी और गुरु अंगददेव एनीमल एंड साइंसेज यूनिवर्सिटी हैं। दोनों यूनिवर्सिटी देश की शीर्ष यूनिवर्सिटी में शामिल हैं। पीएयू में एग्रीकल्चरल कोर्सेज के कुछ प्रोफेशनल कोर्सेज भी हैं, जिनमें शहरी विद्यार्थी दाखिला लेते हैं, जबकि एग्रीकल्चरल कोर्सेज में ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों के ही विद्यार्थी दाखिला लेते हैं। पीएयू और गड़वासू अब शॉर्ट्स टर्म कोर्सेज शुरू किए हैं, जिनसे युवा स्वरोजगार हासिल कर सकते हैं।

रेगुलर फैकल्टी के लिए जूझ रहे कॉलेज
शहर के सरकारी कॉलेजों में दाखिले के लिए सबसे लंबी लाइनें लगी होती हैं, लेकिन शहर के दोनों कॉलेज रेगुलर फैकल्टी के लिए जूझ रहे हैं। कॉलेजों में ज्यादातर पोस्टों पर गेस्ट टीचर काम कर रहे हैं, जिन्हें सिर्फ न तो पूरा वेतन मिलता है और न ही पूरे साल के लिए उन्हें नियुक्त किया जाता है। यही हालत निजी कॉलेजों के भी हैं। कॉलेज इंस्पेक्शन के वक्त रेगुलर भर्ती कर देते हैं, लेकिन बाद में एडहॉक बेस पर टीचर्स नियुक्त कर देते हैं। इस वजह से कॉलेजों में शिक्षा का स्तर गिर रहा है।

सरकारी स्कू्लों के इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की जरूरत
शहर के सरकारी स्कूलों में टीचर्स की कमी नहीं है। अब तो सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी भी खूब हैं, लेकिन स्कूलों में इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण बच्चों को स्तरीय शिक्षा नहीं मिल पा रही। शहर के कुछ सरकारी स्कूलों के पास अपनी जगह न होने की वजह से उनकी इमारतों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल डिवीजन नंबर तीन की इमारत वक्फ बोर्ड की जगह पर है। इसी तरह सरकारी प्राइमरी स्कूल कूचा नंबर 16 की जमीन का विवाद कोर्ट में होने की वजह से बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं।

फंड की कमी से नहीं मिलती सुविधाएं
निजी स्कू्ल बच्चों से मोटी फीस वसूलते हैं, तो उनमें सुविधाएं भी पूरी हैं, लेकिन सरकारी स्कूल फंड की कमी से जूझ रहे हैं। सरकारी प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के हालात तो यह हैं कि उनके पास बिजली का बिल जमा करवाने के लिए भी फंड नहीं है। विभाग स्कूलों को नियमित तौर पर फंड जारी नहीं करता है, जिसकी वजह से स्कूल कई बार बिजली का बिल भी जमा नहीं करवा पाते। यही नहीं स्कूलों की साफ सफाई के लिए भी न तो इन स्कूलों को फंड दिया जाता है और न ही कोई कर्मचारी।

यह बढ़ा रहे हैं शिक्षा क्षेत्र में शहर का सम्मान
यूनिवर्सिटी - 2 (पीएयू एवं गडवासू)
पीयू रीजनल सेंटर - 1
लॉ इंस्टीलट्यूट - 1
पीयू रिसर्च सेंटर - 1
मेडिकल कॉलेज - 3
डेंटल कॉलेज - 1
बीएड कॉलेज - 5
गवर्नमेंट कॉलेज - 2, तीसरे की कुछ समय में शुरू होने की संभावना
एडिड कॉलेज - 9
अनएडिड कॉलेज - 3
टेक्निकल कॉलेज - 5
कोचिंग इंस्टीजट्यूट -12
यूपीएससी कोचिंग इंस्टीटट्यूट - 3
गवर्नमेंट आईटीआई - 2
गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक - 2
एडिड स्कूटल - 15
सरकारी मेरिटोरियस स्कूल - 1
सीबीएसई स्कूल - 70
आईसीएसई स्कूल - 4
इसके अलावा सरकारी प्राइमरी, मिडिल, हाई और सीनियर सेकंडरी स्कूल।

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By Krishan Kumar