जागरण संवाददाता, खन्ना

गांव चक्क माफी का 40 वर्षीय युवा किसान वीर ¨सह पराली जलाए बिना सफल खेती करने की वजह से अन्य किसानों के लिए इलाके में प्रेरणास्त्रोत बने हुए है।

युवा किसान वीर सिंह ने गत वर्ष 32 एकड़ में धान की खेती की थी। कृषि विज्ञान केंद्र फतेहगढ़ साहिब की सलाह पर पराली को सिफारिश किए तकनीक के अनुसार खेतों में ही मिला दिया। वीर ¨सह ने इस बार भी 45 एकड़ में धान की फसल बीजी थी, जिसमें से उसने 20 एकड़ धान की कटाई कर ली। अब वह पराली को बिना जलाए खेत में ही मिला रहा है, ताकि अगली ़फसल की बिजाई की जा सके।

किसान ने बताया कि पराली को खेत में मिलाने के लिए उसने एक मलचर और एक उलटावा हल खरीदा है। उसने अपने खेतों में पड़ी पराली के मलचर से टुकड़े कर खेत में मिला कर 23 एकड़ आलू और 7 एकड़ गेहूं की बिजाई की। इस दौरान तकरीबन 6 लीटर डीजल लगा। इसके उपरांत रोटावेटर से पराली को जोता। रिवर्स पलोय (उलटावें हल) से पराली का 8 -10 इंच गहरा पलटा मार दिया। इस के उपरांत दो बारी सुहागा मारा। फिर दो बार रोटावेटर मार कर आलू की प्लांटर से बिजाई कर दी।

वे बताते हैं कि यदि पराली का पलटा 6 इंच तक ही मारते थे तो पराली प्लांटर में फंसती थी, लेकिन 8 से 10 इंच पर यह परेशानी नहीं आई। गेहूं की बिजाई के लिए मलचर चलाकर एक बार रोटावेटर मार कर फिर पानी दे दिया दी। पानी देने के उपरांत गेहूं की बिजाई करने से पहले दो बार तवियों के साथ सुहागा मारा। इसके उपरांत खेत को सपाट किया। सीड ड्रिल से गेहूं की बिजाई की।

 वीर ¨सह के अनुसार पराली को खेत में मिलाने से जहां खेतों की मिट्टी की सेहत में सुधार हुआ है, वहीं फसल के झाड़ और इसकी गुणवत्ता में भी वृद्धि हुई है। युवा किसान के इस प्रयास के चलते कृषि विज्ञान केंद्र फतेहगढ़ साहिब ने उसे प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित भी किया।

Posted By: Jagran

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