संस, लुधियाना : तपचंद्रिका श्रमणी गौरव महासाध्वी वीणा महाराज, नवकार आराधिका महासाध्वी सुनैया म., प्रवचन भास्कर कोकिला कंठी साध्वी रत्न संचिता महाराज, विद्याभिलाषी अरणवी म., नवदीक्षिता साध्वी अर्शिया, नवदीक्षिता आर्यनंद ठाणा-6 एस एस जैन स्थानक रुपा मिस्त्री गली में सुखसाता विराजमान है। इस अवसर पर साध्वी रत्न संचिता कपर रहित ह्दय में ही दया करुणा रूपी धर्म का निवास बतलाया है। मायावी के ह्दय में अधर्म पनपता है। वह तो विविध भांति झूठ के सहारे जीता है। फलस्वरुप धर्म उसके जीवन में टिक नहीं पाता, सरल चित्र वाला भीतर बाहर से एकरुपता लिए रहता है। उसकी कथनी करनी में एक स²श्ता होती है। वह किसी का भी बुरा नहीं सोचता। इसलिए ईसा मसीह ने बालक के सरल चित्त में ईश्वर का निवास बतलाया है। भक्त का ह्दय भी बालक वत होना चाहिए। तभी उसकी की गई प्रार्थना सफल सार्थक होती है। आज हमारे ह्दय में भीतर हिसा, बाहर अहिसा, भीतर झूठ बाहर सत्ता, भीतर पाप बाहर पुण्य, भीतर लालच बाहर संतोष प्रदर्शित हो रहा है। महासाध्वी वीणा महाराज ने नवकार मंत्र का उच्चारण करते हुए कहा जप से तन, तन आत्मा की शुद्धि होती है। जप हमारे समस्त पापों को नष्ट करता है। हमें अपने ईष्ट देवों को प्रतिदिन न जप, तप करना चाहिए। इस अवसर पर एस एस जैन सभाध्यक्ष अशोक जैन हाईलैंड , महामंत्री योगेश जैन व समस्त कार्यकारिणी सदस्यगण शामिल थे।

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