जागरण संवाददाता, खन्ना : समराला रोड स्थित प्राचीन शिव मंदिर गुग्गा माड़ी के पंडित देशराज शास्त्री ने शिवपुराण की कथा करते हुए बताया कि देशभर में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं और सभी से कोई न कोई पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। आज हम बात करने जा रहे हैं हिदुओं की आस्था के केंद्र रामेश्वरम धाम के बारे में। भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के साथ ही यह हिदू धर्म के प्रसिद्ध चार धाम में से एक है। रामेश्वरम के बारे में कहा जाता है कि भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई से पहले खुद अपने हाथों से इस शिवलिग की स्थापना की थी। इसके बाद प्रभु श्रीराम ने नल और नील के माध्यम से विश्व का पहला सेतु बनवाया था। राम ने पहले शिवलिग पर पूजा-अर्चना की और फिर नल-नील के बनाए पुल से होते हुए लंका पर आक्रमण किया।

शास्त्री ने कथा का वर्णन करते हुए बताया कि लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए भगवान राम ने समुद्र किनारे शिवलिग बनाकर शिवजी की पूजा की थी। इससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें विजयश्री का आशीर्वाद दिया था। आशीर्वाद के साथ ही श्री राम ने शिवजी से अनुरोध किया कि जनकल्याण कि लिए वे सदैव ज्योतिर्लिंग के रूप में यहां निवास करें। उनकी इस प्रार्थना को भोल बाबा ने सहर्ष स्वीकार किया और तब से रामेश्वरम में इस शिवलिग की पूजा हो रही है। यानी यह शिवलिग त्रेतायुग में स्थापित हुआ।

सावन में जलाभिषेक का बहुत महत्व

देशराज शास्त्री ने कहा कि सावन के महीने में रामेश्वरम में जलाभिषेक करने का बहुत महत्व है। मान्यता तो यह भी है कि रामेश्वरम में शिव की पूजा विधिवत करने से ब्रह्म हत्या जैसे दोष से भी मुक्ति मिल जाती है। रामेश्वरम को दक्षिण भारत का काशी कहा जाता है। यहां की धरती को भी भोलेबाबा और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की कृपा से मोक्ष देने का आशीर्वाद प्राप्त है।

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