जागरण संवाददाता, खन्ना : केंद्र सरकार की तरफ से लाए गए खेती कानूनों संबंधी लोगों को जागरूक करने के लिए एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी खन्ना में किसान संसद लगाई गई। सबसे पहले स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का चयन किया गया और सेशन शुरू हुआ। किसान संघर्ष दौरान मारे गए किसानों को श्रद्धांजलि भेंट की गई। संसदीय कार्रवाई के दौरान सत्ता और विरोधी पक्ष की तरफ से •ाोर शोर के साथ अपने पक्ष रखे गए। स्पीकर की तरफ से किसानी संसद को चलाने के लिए सार्थक कोशिश की गई।

आढ़ती एसोसिएशन अनाज मंडी खन्ना के प्रधान हरबंस सिंह रोशा की तरफ से किसानों का स्वागत किया गया और कहा कि यह कानून किसानों के साथ आढ़तियों, म•ादूरों और आम लोगों के ़िखला़फ भी हैं। आढ़ती एसोसिएशन किसानी संघर्ष में हमेशा की तरह किसानों के साथ रहेगी। भारतीय किसान यूनियन नेता राजिन्दर सिंह बेनीपाल ने कहा कि किसान संसद का मुख्य मकसद आम लोगों को काले खेती कानूनों सम्बन्धित जागरूक करना था। केंद्र सरकार की तरफ के पास किए तीनों ही खेती कानून, बिजली संशोधन बिल -2020, पराली जलाने के लिए जुर्माना किसानों के लिए सीधे मौत के वारंट हैं।

दलजीत सिंह स्वैच, हरमिंदर सिंह और निर्मल सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने कोरोना की आड़ में कानून लाकर किसानों की •ामीनें हड़पने की कोशिश की है और इस सरकार ने अब तक आम लोगों की जगह सि़र्फ कार्पोरेट घरानों का ही पक्ष रखा है।

किसानी संसद में चेयरमैन गुरदीप सिंह रसूलड़ा, सुखविन्दर सिंह सुखी, पवन कुमार मिटू, लखविंदर सिंह, अंमृतपाल सिंह वालिया, परमिंदर सिंह औजला, कैप्टन नन्द लाल माजरी, करनैल सिंह सलौदी, सतवंत कौर, निर्मल सिंह रोहणों, बूटा सिंह रायपुर, जतिन्दर सिंह भट्ठल, कुलदीप सिंह गोह, सुखविन्दर सिंह, गुरजीत सिंह इकोलाही, भूपिन्दर सिंह अलोड़, जसपाल सिंह नागरा, गुरमेल सिंह, रछपाल सिंह मान, हिमनप्रीत कौर, मिटू धूरी, दलजीत कौर, गुरमेल सिंह ग्रेवाल, कश्मीरा सिंह, दविन्दर सिंह पंजरुक्खा आदि उपस्थित थे।

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