जागरण संवाददाता, लुधियाना। बैंक अपने ग्राहकों को नाजायज जुर्माने डाल रहे हैं और उसे वसूलने के लिए वो सिबिल स्कोर (CIBIL Score) का सहारा लेकर रिकार्ड खराब कर रहे हैं। ज्यादातर मामलों में प्राइवेट बैंक ऋण चुकाए जाने के बावजूद भी कुछ रकम बकाया कर मनमाने ढंग से पैसे वसूलते हैं। इसको लेकर आल इंडस्ट्री एवं ट्रेड फोरम द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर सिबिल कांसैप्ट को बंद करने की अपील की है। लिखे गए पत्र में ट्रेड के राष्ट्रीय प्रधान बदीश जिंदल ने कहा कि सिब्बल की स्थापना वर्ष 2000 में की गई थी।

सिबिल के आने के बाद ही ज्यादातर बैंक घोटाले आरंभ हुए है। इससे यह साबित होता है कि बैंक घोटालों को रोक पाने में सिब्बल कारगर नहीं है। सिब्बल के बोर्ड आफ डायरेक्टर में ज्यादातर अधिकारी प्राइवेट बैंको से आए हैं और वह अपने बैंको की बकाया वसूली का कार्य सिबिल स्कोरके नाम पर कर रहे हैं। सिबिल द्वारा मनमाने ढंग से ग्राहकों की रेटिंग को कम कर दिया जाता है और इस संबंध में ग्राहकों को कोई भी सूचना नहीं दी जाती। इसके अतिरिक्त पब्लिक डोमेन और पैसा बाजार जैसे एप्स पर ग्राहकों की सभी आर्थिक जानकारियां डाल दिया जाता है। जिन्हें कोई भी आपराधिक तत्व इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री को अपील की गई है कि वह सिबिल के सिस्टम को बंद कर किसी सरकारी रैगुलेटरी अथारिटी का गठन करें, जिसे ग्राहकों की रेटिंग का अधिकार होना चाहिए।

ग्राहकों की रेटिंग के समय प्राइवेट बैंकों संबंधी लेनदेन को शामिल न किया जाए। ग्राहकों की आर्थिक जानकारी को किसी भी पोर्टल पर न डाला जाए और बैंको को भी ग्राहक की सहमति से ही ऐसी जानकारी लेने का अधिकार होना चाहिए। सिबिल स्कोर का प्रभाव ग्राहकों के बैंक ब्याज दर पर नहीं पड़ना चाहिए। लोन लेते समय अगर कोई ग्राहक उसके लिए पर्याप्त सिक्योरिटी दे रहा है, तो इसमें सिब्बल स्कोर को शामिल नहीं करना चाहिए।

-- सिब्बल के कारण उद्योगों को मिल रहा महंगे ब्याज पर लोन

बदीश जिन्दल ने आरोप लगाया कि सिबिल की रेटिंग 300 से 900 के बीच रहती है और रेटिंग जितनी कम होती है, बैंक उतने ही ज्यादा ब्याज दरों पर लोन मुहैया करवाते है। ऐसे में प्राइवेट बैंको की गैर कानूनी कार्रवाई के कारण कारोबारियों के सिबिल स्कोर खराब हो रहे हैं। जिससे उन्हें बैंकों से ज्यादा ब्याज दरों पर कर्ज मिल रहे हैं।

Edited By: Vipin Kumar