लुधियाना [राजन कैंथ]। प्रतीत होता है कि अन्य सभी सरकारी विभागों के कार्यों को निपटाने का जिम्मा भी लुधियाना पुलिस ने संभाल लिया है। वो भी तब जब सभी विभाग अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़े बैठे हों। पुलिस ने शहरवासियों को एक और समस्या से निजात दिलाने की ठान ली है। शहर की सड़कों पर आए दिन हादसों का कारण बन रहे बेसहारा गोवंश को अब माछीवाड़ा के गांव प्वात स्थित सरकारी गोशाला में शिफ्ट किया जाएगा। गोशाला के सामने पेश आ रही धन की समस्या का भी समाधान निकाल लिया गया है। सीपी ने शहर के एक प्रमुख सामाजिक संगठन से बातचीत करके एक करोड़ रुपये के फंड का इंतजाम किया है। पुलिस द्वारा किये जाने वाले इस कार्य के लिए निगम को आगे आना चाहिए था, मगर ये श्रेय लेकर पुलिस ने निगम और सरकार से हर महीने लाखों रुपये का फंड ले रही गोशालाओं के संचालकों के मुंह पर तगड़ा तमाचा जड़ा है।

भाजी सीपी बदल गया

बुधवार की दोपहर लॉटरी और सट्टे का काम करने वालों के फोन घनघनाने लगे। सब एक दूजे से पता करने में लगे थे कि क्या वाकई में पुलिस कमिश्नर का तबादला हो गया है? सब अपने सूत्रों से जानकारियां जुटाने में लगे हुए थे। कोई पुलिस कर्मचारी या अधिकारी को तो कुछेक ने शहर के पत्रकारों को भी फोन करके सूचना की पुष्टि करने को कहा। एक सट्टेबाज ने पत्रकार को फोन करके पूछा..भाजी सीपी बदल गया? तिन्न महीने तों दुकान बंद पई आ,  खाली दा कराया पई जांदा। दरअसल हुआ यूं कि पिछले दिनों शहर में अफवाह उड़ गई कि सीपी का तबादला हो गया है और नया सीपी लगाया जा रहा है। इस बात का पता चलते ही अवैध कारोबार बंद होने पर बेकार बैठे लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। लेकिन यह खुशी क्षणिक ही रही, सच का पता चलते ही उनमें फिर से मायूसी छा गई।

पीसीआर का गाइड करो, जेब भरो फार्मूला

पुलिस जब भी कोई प्रतिबंध लगाती है तो पीसीआर वालों की चांदी हो जाती है। चाहे वो शराब तस्करी हो, मिट्टी के तेल की काला बाजारी  अथवा दड़े-सट्टे का काला कारोबार हो। यह सभी काम शहर में धड़ल्ले से चलते हैं, जबकि पीसीआर टीमों का दावा है कि वो इनपर बराबर नजर रखते हैं। अब वो किस पर नजर रखते हैं यह खुदा जाने या फिर वो खुद जाने। अब पुलिस ने अतिक्रमण पर पाबंदी लगाई गई है तो पीसीआर टीमों ने वहां भी आमदन जरिया निकाल लिया। शहर के मुख्य बाजारों में रेहड़ी-फड़ी लगाना मना है। मगर पीसीआर वाले दुकानदारों को गाइड कर रहे हैं कि अधिकारियों की नजर से दूर मेन सड़क छोड़ साथ सटती कौन सी गली में रेहड़ी लगानी है। ताकि पुलिस रेड की स्थिति में भी रेहड़ी वालों को पहले ही चौकस कर सकें। पीसीआर का गाइड करो, जेब भरो फार्मूला अच्छा है।

लूटने लगी स्टेशन की लेबर

एक समय था जब होटलों, ढाबों अथवा अन्य व्यावसायिक संस्थानों पर काम करने के लिए लेबर की जरूरत पडऩे पर रेलवे स्टेशन ही ध्यान में आता था। स्टेशन परिसर के बाहर काम की तलाश में बैठे लोगों को भी रोजगार मिल जाता था, लेकिन समय के साथ अब उन मजदूरों की जगह को शातिर बदमाशों ने अपना अड्डा बना लिया है। जो वहां लेबर की तलाश में आने वाले ढाबा व होटल संचालकों को अपना शिकार बना रफूचक्कर हो जाते हैं। गिल रोड में ढाबा चलाने वाले राज कुमार ने कहा कि पिछले महीने बर्तन साफ करने के लिए स्टेशन से एक मजदूर को लाए थे, लेकिन दो दिन बाद वो उनके गल्ले से हाथ साफ कर फरार हो गया। 15 दिन पहले उन्हें फिर से लेबर की जरूरत पड़ी। इस बार भी नौकर रखा था, लेकिन दो दिन बाद ही सामान लाने के लिए दिए पैसे लेकर भाग निकला।

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