यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 03, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Diwali 2021 Celebration: दीपों से रोशनी फैलाकर मनाएं दीवाली; पटाखों से दूरी बनाएं, चलाएं तो ये सावधानियां अपनाएं
Diwali 2021 Celebration एमएम मेडिकल कालेज के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर व पंजाब के जाने माने प्लास्टिक सर्जन डा. ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, लुधियाना। Diwali 2021 Celebration: दीवाली को दीपों का त्योहार भी कहा जाता है। दीयों की रोशनी की चमक से अमावस्या की काली रात भी जगमगा उठाती है। पिछले कुछ सालों से दीपों के इस त्योहार को पटाखों के शोर शराबे के साथ मनाया जा रहा है। इसके दुष्प्रभाव अब सामने आ रहे हैं। पटाखों की वजह से जहां पर्यावरण को बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है, वहीं इसकी लोगों की जिंदगी भी खतरे में पड़ रही है। ऐसे में एक्सपर्ट का कहना है कि दीपावली के दिन पटाखे जलाने से बचना चाहिए।
नेशनल अकेडमी आफ बर्न्स के पूर्व प्रेसिडेंट और लुधियाना मेडिवज अस्पताल के सीनियर प्लास्टिक सर्जन डा. रविंदर ताह कहते हैं कि केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट कह रही है कि पटाखे नहीं जलने चाहिए। हमने देखा है कि दीवाली की रात और उसके अगले दिन हमारे पास अनार, राॅकेट और दूसरे बड़े पटाखों हाथ, आंखें, त्वचा झुलसने के कई मामले आते हैं। कई लोगों की आंख की रोशनी तक चली जाती है। झुलसने वालों में बच्चे सबसे अधिक होते हैं। इसलिए, हम चाहते हैं कि लोग पटाखे, खासकर अधिक आवाज और प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे न जलाएं।

डा. संजीव उप्पल एवं डा. रविंदर ताह।
अगल पटाखे जलाने हैं तो ये सावधानियां अपनाएं
- किसी ने पटाखे जलाने हैं, तो सेफ्टी जरूर रखें।
- पटाखे जलाने के दौरान ढीले कपड़े न पहनें।
- जहां पटाखे जलाएं वहां पानी की व्यवस्था होनी चाहिए।
- पटाखे दूर खड़े होकर जलाने चाहिए।
- बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें।
एमएम मेडिकल कालेज के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर व पंजाब के जाने माने प्लास्टिक सर्जन डा. संजीव उप्पल कहते हैं कि कुछ सालों में दीपावली के समय जिस तरह से वायु प्रदूषण की समस्या आ रही है, उससे लोगों को समझना होगा कि दीपावली दीपों और खुशियों का त्योहार है न कि आवाज, शोर और प्रदूषण का। पटाखें न सिर्फ शरीर के लिए हानिकारक हैं बल्कि यह वातावरण को भी दूषित करते हैं। इसलिए लोग पटाखे जलाने से परहेज करें। खासकर, घर के बड़े। अगर घर में बच्चे पटाखे जलाने की जिद्द करते हैं, तो कम आवाज वाले छोटे पटाखे ही उन्हें लाकर दें। जैसे फुलझड़ी, चक्री, छोटे अनार। हर साल बड़े पटाखों से बच्चों के झुलसने के काफी मामले आते हैं। बच्चे हाथ में पटाखे पकड़कर चलाते हैं, अनार चलाते वक्त सावधानी नहीं रखते।
पटाखे चलाते समय सूती वस्त्र पहनें
पटाखे जलाने के दौरान सूती टाइट कपड़े पहनने चाहिए। अनार माचिस की तिली से न जलाकर फुलझड़ी से जलाएं। इससे अनार दो से तीन फीट की दूरी हो जाती है। जिससे आंखाें और चेहरे के अनार के संपर्क में आने की संभावना कम हो जाती है। दूसरा पटाखे छत पर चलाएं, न कि सड़क के बीचों बीच। सड़क पर चलाने से राहगीरों के साथ दुघर्टना होने का खतरा बढ़ जाता है।
राकेट जलाने के लिए प्लास्टिक की बाेतल की जगह शीशें की बोतल इस्तेमाल करें। प्लास्टिक की बोतल हल्की होने के कारण कई बार गिर जाती है, जिससे पटाखे जलाने वाले संपर्क में आ जाते हैं। अगर कांच की बोतल नहीं मिल रही है, तो प्लास्टिक की बोतल में थोड़ा पानी भर लें। इससे बोतल भारी हो जाएगी और राकेट के भार से गिरेगी नहीं।
चकरी चलाते समय कूदें नहीं
वहीं चक्री चलाते वक्त बच्चे कूदते हैं, जो कि सही नहीं है। वहीं बम चलाते वक्त उस पर डिब्बा या कोई अन्य चीज नहीं रखनी चाहिए। इससे बम चलाने वाले और दूसरे लोगों को चोट लग सकती है।
झुलसने वाले हिस्से को 15 मिनट तक बहते पानी में रखें
वहीं पटाखे चलाने के दौरान पानी की बाल्टी अपने पास जरूर रखें। अगर किसी का पटाखों की वजह से हल्के तौर पर हाथ, चेहरा जल जाता है, तो तुरंत उस हिस्से को 15 मिनट तक बहते हुए पानी में रखें।
