लुधियाना [मुनीश शर्मा]। लुधियाना में पिछले कई सालों से चुनावी मुद्दा बनता रहा मिक्सलैंड यूज इलाकों का मुद्दा कई सालों से सरकार बदलने के बावजूद भी वैसा का वैसा ही खड़ा है। ऐसे में हर चुनाव में उद्यमियों की ओर से इस मुद्दे को हर राजनीतिक पार्टी के समक्ष उठाया जाता है, लेकिन इसका हल न होने से उद्यमियों को हर साल निराशा ही हाथ लगती है। इसको लेकर कुछ समय के लिए एक्सटेंशन तो दे दी जाती है। लेकिन इसका स्थाई हल नहीं हो पा रहा। ऐसे में उद्यमी इन विधानसभा चुनावों में भी इसे अपने प्रमुख मुद्दे के रुप में ले रहे हैं और हर राजनीतिक पार्टियों के साथ उद्यमियों की होने वाली बैठक में इसे तत्परता से उठाया जा रहा है।

उद्यमियों का तर्क है कि कई सालों से शहर में मिक्सलैंड यूज इलाकों में इंडस्ट्री और रिहायश होने से किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही। जबकि मास्टर प्लान के मुताबिक इंडस्ट्री को मिक्सलैंड यूज से बाहर किए जाना है। लेकिन सरकार इसके लिए अभी तक कोई विकल्प नया फोकल प्वाइंट वाजिब दामों में नहीं दे पाई है। बात लुधियाना उद्योग की करें, तो 70 फीसदी इंडस्ट्री हौजरी, साइकिल एवं साइकिल पार्टस. हैंडटूल, मशीन टूल, इंजीनियरिंग गुड्स इन मिक्सलैंड यूज इलाकों में है, जबकि बड़े कारपोरेट घरानों को भी यहीं की प्रोडक्शन से रा मैटीरियल मिल पाता है।

मिक्सलैंड यूज इंडस्ट्री की बदौलत ही लुधियाना साइकिल और हौजरी के लिए देश विदेश में अहम कलस्टर माना जाता है। ऐसे में अब इंडस्ट्री की मांग है कि मिक्सलैंड यूज इलाकों में ग्रीन कैटागिरी इंडस्ट्री को इंडस्ट्रीयल इलाके घोषित किए जाए और केवल रेड कैटागिरी इंडस्ट्री को शहर के भीतर फोकल प्वाइंट वाजिब दामों में दिए जाएं। ताकि इंडस्ट्री ग्रोथ की ओर अग्रसर हो सके।

मिक्सलैंड इलाकों का लुधियाना में अहम योगदान

कितने इलाके- 72

प्रमुख इलाके- जनता नगर, न्यू जनता नगर, शिमलापुरी, दशमेश नगर, चेत सिंह नगर, प्रताप नगर, एसएएस नगर, गुरपाल नगर, कोट मंगल सिंह, सुंदर नगर, शिवपुरी, बाजवा नगर प्रमुख एरिया है।

उत्पादों का निर्माण- हौजरी, साइकिल पार्टस, आटो पार्टस, एग्रीकल्चर पार्टस एवं इंजीनियरिंग गुड्स बनते हैं।

यूनिट्स- 50 हजार यूनिट्स

सरकार तत्काल इंडस्ट्रीयल एरिया घोषित करे

यूनाइटेड साइकिल एवं पार्टस मैन्यूफेक्चरर एसोसिएशन के प्रधान डीएस चावला ने कहा कि मिक्सलैंड यूज इंडस्ट्री को तत्काल इंडस्ट्रीयल एरिया घोषित किए जाना चाहिए। केवल दस प्रतिशत इंडस्ट्री ही रेड कैटागिरी से संबंधित है। ऐसे में 90 प्रतिशत ग्रीन कैटागिरी इंडस्ट्री को राहत देनी चाहिए। हर बार जो सरकार आती है, वह इस समस्या के समाधान की बात कहती है। इस संबंध में शीघ्र इंडस्ट्री का एक प्रतिनिधि मंडल कैबीनेट मंत्री भारत भूषण आशु से मिलेगा।

एक्सटेंशन नहीं हमें चाहिए स्थाई हल

स्माल स्केल मैन्यू्फेक्चरर एसोसिएशन के प्रधान जसविंदर ठुकराल के मुताबिक हर बार चुनावों के दौरान तो इस समस्या के समाधान की बात कही जाती है। लेकिन कई सालों से समस्या वैसी की वैसी है। इसलिए इसके स्थाई हल होना चाहिए। न कि केवल कुछ समय की एक्सटेंशन दी जाए। क्योंकि हर चुनावों में यह मुद्दा बन जाता है और हर पार्टी इसमें राजनीतिक रोटियां सेकती है, लेकिन एक्सटेंशन का लालीपाप दे दिया जाता है।

Edited By: Vinay Kumar