संवाद सहयोगी, जगराओं : केंद्र सरकार की ओर से किसान संघर्ष के दौरान तीनों कृषि कानून वापस लेने के बाद किसानों की अन्य मांगों के संबंध में भी कई तरह की घोषणा की गई थी। इन मांगों को पूरा करने पर केंद्र सरकार गंभीर नहीं है। दिल्ली में किसान संगठनों की बैठक से लौटे किरती किसान यूनियन के राज्य प्रधान हरदेव सिंह संधू ने किसान संगठनों के हर फैसले के साथ खड़े होने और हर तरह से समर्थन करने का फैसला लेते हुए 31 जनवरी को दिए गए कार्यक्रम को पूरी तरह से सफल बनाने के लिए गांव स्तर तक बैठकें आयोजित करने के लिए संगठन के सदस्यों को प्रेरित किया। इस संबंध में किरती किसान यूनियन पंजाब की माणुके इकाई की कार्यकारी कमेटी की अहम बैठक प्रधान गुरचरण सिंह बिल्लू की अगुआई में हुई। कर्मजीत सिंह माणुके ने बताया कि मीटिग दौरान संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 31 जनवरी को देशभर में वादाखिलाफी दिवस के तौर पर मनाने के आह्वान को पूरी तरह से लामबंद करते हुए केंद्र सरकार के पुतले जलाए जाएंगे। राज्य प्रधान हरदेव सिंह संधू ने कहा कि भले ही संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में संघर्ष द्वारा महत्वपूर्ण जीत हासिल की है और केंद्र सरकार को कानून रद करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह संघर्ष अभी जारी है क्योंकि लखीमपुर खीरी धक्केशाही का विरोध करते हुए जेलों में बंद किसानों की रिहाई, दर्ज किए गए मुकदमों की वापसी, किसान संघर्ष में जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा, कर्ज मुक्ति आदि मांगे अभी पूरी नहीं की गई। इसके अलावा किसान संगठनों की महत्वपूर्ण मांग एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी की मांग पर भी टालमटोल किया जा रहा है। इस मौके पर किसान संघर्ष को बीच में छोड़कर चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों के बारे में उन्होंने कहा कि किसान संघर्ष को किसी भी तरह से कमजोर नहीं होने देना चाहिए। इस बैठक में संगठन के कैशियर जग्गा सिंह, गुरदीप कौर, परमजीत कौर, सुरजीत कौर, गुरमेल सिंह, सुखविदर सिंह सहित अन्य उपस्थित थे।

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