लुधियाना [कृष्ण गोपाल]। धार्मिक व सामाजिक कार्यों में लोगों की आस्था का केंद्र श्री दुर्गा माता मंदिर जगराओं पुल में मां दुर्गा के सभी 9 स्वरूप विराजमान हैं। माता के इन रूपों के दर्शन के लिए रोजाना सैकड़ों की तादाद में लोग यहां पहुंचते हैं। यह मंदिर जगराओं पुल के पास फिरोजपुर रोड व क्लब रोड के टी प्वाइंट पर स्थित है जोकि शहर में दुर्गा माता मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर काफी पुराना है और पहले सिर्फ मुख्य गर्भगृह था जहां पर मां दुर्गा की प्रतिमा विराजमान है। यह मंदिर शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां मां के दर्शनों के लिए भक्तों का तांता शुरू से लगा रहता है। 26 अप्रैल 1950 को मंदिर की स्थापना स्व. मुनि लाल मित्तल व स्व. शांति देवी मित्तल द्वारा करवाई गई। 

1971 से ज्वाला जी से लाई अखंड ज्योति आज भी है प्रज्जवलित

मंदिर प्रांगण में वर्ष 1971 में ज्वाला जी की जो अखंड ज्योति लाई गई वह आज भी प्रज्जवलित हो रही है। पंडित जीवन दत्त ने 1952 से 1990 तक मुख्य पुजारी के रुप मां की सेवा की। आज पंडित हरि मोहन शर्मा सहित, पंडित नागेंद्र शास्त्री आदि सेवाएं दे रहे है। यहां पर ज्योति आज भी प्रज्जवलित होती है और भक्त इसके दर्शन कर अपने आप को धन्य मानते हैं।

श्री दुर्गा माता मंदिर ट्रस्ट का गठन

शांति देवी मित्तल ने 13 जनवरी 1984 को श्री दुर्गा माता मंदिर ट्रस्ट का गठन किया। जिसमें लाला लाजपत राय, जोगिंदर पाल पांडे, मुनि लाल जैन आदि शामिल थे। आज भी मंदिर की संभाल ट्रस्ट कर रहा है, जिनके चेयरमैन पुरुषोत्तम मित्तल, महामंत्री बीके गोयल, फाइनांस सेकेट्री पीएल सिंगला, सीनियर उपचेयरमैन वरिंदर मित्तल, उप चेयरमैन संजय गोयल, सेकेट्री अश्वनी जैन, कुलभूषण बांसल ज्वाइंट फाइनांस सेकेट्री, सहित एक्जीक्यूटिव सदस्यगण शामिल है।

धर्म के साथ सामाजिक सेवाएं में अग्रणी श्री दुर्गा माता मंदिर: वरिंदर मित्तल

सीनियर वाइंस प्रेजीडेंट वरिंदर मित्तल ने कहा कि 150 विधवाओं को राशन, प्रतिदिन 200 लोगों को दोपहर का लंगर, लड़कियों के लिए निश्शुल्क सिलाई केंद्र, कंप्यूटर शिक्षा, विद्याार्थियों के लिए स्कूल की फीस व किताबों की सहायता सहित मंदिर प्रांगण में अस्पताल भी है, जहां पर कम रेटों पर जरुरतमंदों का इलाज सहित कैंप लगाएं जाते है।

देवी-देवताओं की है प्रतिमाएं

मुख्य गर्भ गृह के साथ मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, काली, महागौरी व सिद्धदात्री की मूर्तियां क्रम से स्थापित की गई हैं। इसके अलावा मंदिर में भगवान शिव पार्वती की प्रतिमाएं भी हैं। सामान्य दिनों में यहां जहां रोजाना सैकड़ों भक्तजन आते हैं, वहीं नवरात्र व अन्य विशेष पर्वाें पर हजारों की तादाद में श्रद्धालु यहां आते हैं।

Edited By: Vinay Kumar