बिदु उप्पल, जगराओं

कृषि विधेयकों के खिलाफ चल रहे धरनों के बीच पंजाब सरकार ने इस बार धान की खरीद एक सप्ताह पहले कर दी है ताकि जमींदारों के धान की सरकारी खरीद शुरू होने से उनका गुस्सा कम हो जाए। मगर ऐसा होने वाला नहीं है। रविवार को चाहे मंडियों में धान की सरकारी खरीद शुरू हो गई मगर जगराओं में पहले दिन किसी भी केंद्र में किसान धान लेकर नहीं पहुंचा। इस कारण कोई खरीद नहीं हुई।

वैसे जगराओं की दाना मंडी व अजीतवाल की दोनों मंडियों में हर वर्ष धान की आमद व सरकारी खरीद 15 दिन देरी से ही होती है। जगराओं आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान राज कुमार भल्ला ने कहा कि इस बार सरकारी आदेशों को देखते हुए सोमवार को धान की खरीद की शुरुआत रस्मी तौर पर कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इस बार धान की खरीद के समय आढ़तियों, जमींदारों व किसानों को थोड़ी परेशानियों का सामन करना पड़ेगा। जानकारी के अनुसार पिछले धान के सीजन का 105 करोड़ रुपये की अदायगी करना अभी बाकी है। इसके अलावा आढ़तियों का 131 करोड़ रुपये का बकाया है। इस वर्ष सूबे में धान की खरीद एक अक्टूबर के बाद होती है और लेबर भी एक अक्टूबर के आसपास आनी शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार अभी चाहे धान की खरीद शुरू हो गई लेकिन लेबर तो अक्टूबर के पहले सप्ताह ही पहुंचेगी। पेमेंट सीधे खातों में डालने का विरोध : थापर

आढ़ती जसवंत थापर ने बताया कि मोदी सरकार ने फसल की अदायगी आढ़तियों के जरिए न करके उनके सीधे खातों में जमा किए जाने की घोषणा की है जिसका आढ़ती व जमींदार दोनों विरोध करते हैं, क्योंकि जमींदार पहले की तरह अपनी फसल की अदायगी आढ़ती से करवाना चाहता है ताकि समय पर उसकी फसल के पैसे मिले। अब मंडियों के साथ यार्ड किए स्थापित : भल्ला

प्रधान राज कुमार भल्ला ने बताया कि कोविड-19 के चलते सरकार ने धान की खरीद के लिए मंडियों के साथ यार्ड स्थापित किए हैं। पूरे पंजाब में 4100 खरीद सेंटर हैं जिसमें से 1200 शैलर हैं। ऐसे में शैलरों के सेंटरों को यार्ड घोषित कर दिया है ताकि अब मंडियों में धान की फसल को लेकर भीड़ न हो और आढ़ती अपने शैलरों पर फसल उतरवा सकते हैं। बारदाने की आएगी किल्लत: भारद्वाज

आढ़ती धर्मेंद्र भारद्वाज ने बताया कि इस बार धान की खरीद को लेकर सरकार का बारदाने को लेकर कोई उचित प्रबंध नही है। इस बार बारदाने की 20 प्रतिशत किल्लत रहेगी। क्योंकि सरकार इस बार 50 प्रतिशत पुराना बारदाना देगी।

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