जेएनएन, लुधियाना। लोकसभा चुनाव की आहट के बीच पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने सोमवार को विधानसभा में अगले वित्त वर्ष का बजट पेश किया। इसमें कृषि एवं किसान के लिए कई उपाय किए गए, इसके बावजूद किसानों को मनप्रीत का बजट नहीं भाया। उनका तर्क है कि बजट में किए गए प्रावधानों से किसानों का हित नहीं होगा। न ही उनको सशक्त मार्केटिंग मिलेगी और न ही कर्ज का बोझ उतरेगा। भारतीय किसान यूनियन राजेवाल के जनरल सेक्रेटरी ओंकार सिंह मानते हैं कि बजट में किसान को दिशा देने के लिए ठोस उपाय नहीं किए गए हैं। किसानों पर एक लाख करोड़ से अधिक का कर्ज है और केवल तीन हजार करोड़ का कर्ज माफी के लिए बजट रखना नाकाफी है। कैप्टन ने चुनावों से पहले कर्जा कुर्की खत्म करने का वादा किया था। सरकार ने 2017-18 बजट में 1500 करोड़ रुपये, वर्ष 2018-19 बजट में 4250 करोड़ रुपये और अब 2019-20 के लिए 3000 करोड़ रुपये रखे हैं। जबकि अब तक केवल 4500 करोड़ का ही कर्ज माफ हुआ है।

साफ है कि बजट में प्रावधान के अनुसार भी किसान का कर्ज माफ नहीं हो रहा है। कुल मिलाकर सरकार अपने वादों से भागती दिख रही है। बजट में फसल के उचित मूल्य को लेकर भी कोई कदम नहीं उठाया गया है। किसानों को मक्की, आलू, सब्जी इत्यादि में काफी नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई के लिए उपाय नहीं दिख रहे हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार ने किसान को डायरेक्ट इनकम के तहत छह हजार रुपये सालाना, तेलंगाना सरकार ने दस हजार रुपये और मध्य प्रदेश सरकार ने 15 हजार रुपये देने का प्रावधान किया है, लेकिन पंजाब ने इस दिशा में भी कोई कदम नहीं उठाया। ऐसे में किसान आर्थिक तौर पर मजबूत कैसे हो पाएगा।

किसानों के साथ किया गया मजाक : हरमीत सिंह

भारतीय किसान यूनियन पंजाब के प्रधान हरमीत सिंह भी मानते हैं कि बजट में किए प्रावधान किसान के साथ किए मजाक के बराबर हैं। बजट में केंद्र सरकार की स्कीमों के लिए मै¨चग ग्रांट का भी कोई प्रबंध नहीं किया गया। किसानों की कृषि उपकरण, कीटनाशक इत्यादि की दो साल की सब्सिडी रूकी हुई है। इसके अलावा कृषि उत्पादों के निर्यात एवं एग्रो उद्योग को बढ़ावा देने की पहल बजट में नहीं हुई। किसानों के लिए बजट में किसी भी तरह की बीमा नीति नहीं आई।

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