कृष्ण गोपाल, लुधियाना : खिलाड़ियों की मेहनत की सत्ता में आई विभिन्न सरकारों ने कदर नहीं की है। जब नए खिलाड़ियों को खेलों के प्रति प्रेरित करते हैं, तो उल्टा युवा खिलाड़ियों का जवाब आता है कि आप ने अभी तक क्या पाया, इन बातों को सुनकर हमारे पास इसका कोई जबाव नहीं होता। यह दर्द भरे विचार दैनिक जागरण के समक्ष रखे नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लायंड स्पोक पर्सन सचिव व अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी गुरप्रीत सिंह ने रख्रे। उेनका कहना था कि इस हताशा के पीछे सरकारें जिम्मेदार हैं।

दिव्यांगों को मिले समानता पुरस्कार राशि का अधिकार

गुरप्रीत का कहना है हरियाणा जहां आम व दिव्यांग खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि में समानता का अधिकार दे रही है, वहीं पंजाब सरकार का दिव्यांग खिलाड़ियों के प्रति उदासीनता का रवैया निराशा जनक है। आम खिलाड़ियों को जहां करोड़ों की राशि मिलती है, वहीं दिव्यांगों को समानता पुरस्कार राशि का अधिकार नहीं मिलता।

दिव्यांग खिलाड़ी हैं खेल पॉलिसी में जमीन आसमान का अंतर

वर्ष 2010-11 में पिछली सरकार की ओर से बनाई गई पैरा ओलंपिक खेल पॉलिसी में केंद्र के खेल मंत्रालय, हरियाणा की पुरस्कार राशि में जमीन आसमान का अंतर। खेल मंत्रालय, हरियाणा की खेल पालिसी पैरा ओलंपिक के बराबर राशि रखी गई है। आम खिलाड़ियों को जहां करोड़ों की राशी मिलती है वहीं पैरा ओलंपिक को नाममात्र।

पंजाब में ओलंपिक गोल्ड सिल्वर कांस्य पदक

ओलंपिक 2.50 करोड़ 1. 1 करोड़ 70 लाख

एशियन मेडलिस्ट 26 लाख 21 लाख 16 लाख

व‌र्ल्ड चैंपियनशिप 21 लाख 16 लाख 7 लाख

हरियाणा पैरा ओलंपिक गेम्स 6 करोड़ 3 करोड़ 2 करोड़

एशियन व व‌र्ल्ड चैंपियनशिप 3 करोड़ 2 करोड़ 1 करोड़

खेल मंत्रालय 70 लाख 50 लाख 30 लाख

एशियन व व‌र्ल्ड गेम्स बराबर राशि 25 लाख 20 लाख 15 लाख

पंजाब सरकार पैरा ओलंपिक 5 लाख 3 लाख 2 लाख

एशियन व व‌र्ल्ड गेम्स बराबर राशि 2 लाख 1.50 लाख 75 हजार

इस बारे में खेल विभाग निर्देशक अमृत कौर गिल से मिलकर बातचीत की गई है, उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही इस मामले को हल कराया जाएगा।

राजेंद्र सिंह रेहलू, पैरा ओलंपिक अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी।

Posted By: Jagran

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